







दमोह (बालाघाट)। वैशाख पूर्णिमा के पावन अवसर पर दमोह सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों में त्रिगुणी महापर्व बुद्ध पूर्णिमा अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और धार्मिक गरिमा के साथ मनाई गई। प्रज्ञा दीप बुद्ध विहार दमोह इस अवसर पर आध्यात्मिक आस्था, धम्म साधना और मानव कल्याण के संदेश का प्रमुख केंद्र बना, जहां बड़ी संख्या में बौद्ध उपासक-उपासिकाओं ने सहभागिता कर तथागत बुद्ध को श्रद्धापूर्वक नमन किया।
प्रातःकाल से ही दमोह, लोरा, पल्हेरा, मलाजखंड, अचानकपुर, मंजगांव (सालेटेकरी) सहित क्षेत्र के विभिन्न ग्रामों से श्वेत वस्त्र धारण किए श्रद्धालु मोमबत्ती, अगरबत्ती, फल-फूल एवं खीर की थालियां लेकर बुद्ध विहारों की ओर उमड़ पड़े। प्रज्ञा दीप बुद्ध विहार में पूज्य भंते जी के सानिध्य में सामूहिक त्रिशरण एवं पंचशील वंदना संपन्न हुई, जहां श्रद्धालुओं ने गहन आस्था के साथ धम्म मार्ग का अनुसरण करने का संकल्प लिया।
इस पुण्य अवसर पर उपासक-उपासिकाओं ने भंते जी को चीवर दान अर्पित कर पुण्य लाभ अर्जित किया। पूजा-अर्चना के पश्चात सुजाता की खीर का वितरण किया गया, जिसने कार्यक्रम को सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्व प्रदान किया।
संध्या बेला में विश्व शांति, करुणा और मानव कल्याण की कामना के साथ भव्य कैंडल मार्च का आयोजन किया गया। हाथों में प्रज्ज्वलित मोमबत्तियां लिए बुद्ध अनुयायियों ने ग्राम भ्रमण कर पूरे क्षेत्र को “बुद्धं शरणं गच्छामि” के उद्घोष और प्रकाश की दिव्य आभा से आलोकित कर दिया। ग्राम के प्रत्येक द्वार पर दीप प्रज्वलित कर भगवान बुद्ध के त्रिगुणी महापर्व को भव्यता के साथ मनाया गया।
आल इंडिया समता सैनिक दल के प्रांतीय क्षेत्रीय सचिव एवं सामाजिक कार्यकर्ता आयुष्मान एस.आर. उके ने बताया कि वैशाख पूर्णिमा केवल धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि प्रकृति और मानवता के महान समन्वय का प्रतीक है। इसी दिन लुम्बिनी में सिद्धार्थ गौतम का जन्म, बोधगया में ज्ञान प्राप्ति और कुशीनगर में महापरिनिर्वाण हुआ, जो इसे त्रिगुणी महापर्व बनाता है।
कार्यक्रम में भगवान बुद्ध के अंतिम उपदेश—शील, सत्य, अहिंसा, सदाचार और “अत्त दीपो भव” के संदेशों को आत्मसात करने का आह्वान किया गया। वक्ताओं ने कहा कि बुद्ध के बताए मार्ग पर चलकर ही समाज, राष्ट्र और विश्व में स्थायी सुख, शांति और समता स्थापित की जा सकती है।
समस्त प्राणियों के मंगल, मैत्री और कल्याण की भावना के साथ संपन्न यह आयोजन सामाजिक समरसता, आध्यात्मिक चेतना और मानवता के सार्वभौमिक मूल्यों का प्रेरणादायी संदेश बनकर उभरा।

