Thursday, June 11, 2026
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एक दिवसीय वैचारिक धम्म संगोष्ठी का सफल आयोजन

एक दिवसीय वैचारिक धम्म संगोष्ठी का सफल आयोजन

मूकनायक
कमलेश लवहात्रै

छत्तीसगढ़

बुद्धिष्ट प्रचारक विंग, छत्तीसगढ़ द्वारा धम्म के प्रचार-प्रसार हेतु दुर्ग जिले के समता नगर में एक दिवसीय वैचारिक धम्म संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी “घर-घर संगोष्ठी” अभियान के अंतर्गत समता सुरक्षा सेना के महासचिव आयु. अनिल जोग एवं डॉ. वेदिता जोग के निवास पर संपन्न हुई। आयोजन के लिए जोग परिवार के प्रति संगठन ने हार्दिक आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक त्रिशरण एवं पंचशील के वाचन से हुई, जिससे वातावरण धम्ममय हो उठा। इसके पश्चात डॉ. सरोज बौद्ध द्वारा संविधान की उद्देशिका का वाचन किया गया और श्रोताओं के बीच वैचारिक संवाद स्थापित किया गया। विचारोत्तेजक प्रश्नों के उत्तर देने वाले प्रतिभागियों को सृष्टि द्वारा पेन देकर प्रोत्साहित किया गया।
इस संगोष्ठी का मुख्य विषय था—
“डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा जाति-निर्मूलन और जातिविहीन समाज की संकल्पना के संदर्भ में जाति जनगणना में क्या लिखा जाना उचित होगा?”
इस विषय पर उपस्थित उपासक-उपासिकाओं ने अपने विचार व्यक्त किए। सविता बौद्ध ‘संकल्पी’ ने इस विषय पर विस्तारपूर्वक मार्गदर्शन करते हुए तार्किक और जागरूक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।

जयश्री बौद्ध ने बौद्ध समाज को क्या नहीं करना चाहिए, इसे उदाहरण सहित स्पष्ट किया और साथ ही यह भी बताया कि बौद्धों को किन आचरणों को अपनाना चाहिए। खुशबू बौद्ध जी ने संक्षिप्त लेकिन प्रभावशाली शब्दों में बौद्ध जीवनशैली के मूल तत्वों पर प्रकाश डाला।

///संगोष्ठी में यह महत्वपूर्ण संदेश दिया गया कि—/

“संस्कारों की जानकारी के अभाव में बौद्ध संस्कृति सुदृढ़ नहीं हो पाई है, अतः हमें अपने विचार, उच्चार और आचार में बौद्ध संस्कारों को अपनाना होगा।”

सविता बौद्ध ‘संकल्पी’ ने 22 प्रतिज्ञाओं, बौद्ध संस्कारों एवं बौद्ध पर्वों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। उनके स्वलिखित प्रेरणादायक गीतों ने सभी को भावविभोर कर दिया।
सुनीता बौद्ध द्वारा उपस्थित सभी उपासक-उपासिकाओं को 22 प्रतिज्ञाएं दिलाई गईं।
इस अवसर पर “बौद्धधर्म: एक बुद्धिवादी अध्ययन” पुस्तक जोग परिवार को सप्रेम भेंट की गई।
अंत में मंगल मैत्री के साथ संगोष्ठी का समापन हुआ तथा खुशबू बौद्ध जी द्वारा आभार प्रदर्शन किया गया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बुद्ध-आंबेडकरी अनुयायी, युवा एवं बच्चों की सक्रिय सहभागिता रही, जो समाज में जागरूकता और समता के संदेश को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देती है।

🌿 संदेश:
“बौद्ध बनें, बौद्ध लिखें, बौद्ध दिखें।”

🪴 धम्म प्रचारिका
जयश्री बौद्ध 🪴

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