मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
✍️✍️
जीवन में हम अक्सर रिश्तों को बचाने की जद्दोजहद में खुद को खो देते हैं। हम उन लोगों के साथ खड़े रहने की कोशिश करते हैं, जो ना तो हमारी भावनाओं को समझते हैं और ना ही हमारे अस्तित्व का सम्मान करते हैं, लेकिन एक कड़वा सच यह है कि गलत साथ से बेहतर अकेलापन है। जब आप ऐसे लोगों के साथ होते हैं, जो आपकी कद्र नहीं करते, तो आप केवल अपना समय ही बर्बाद नहीं करते, बल्कि धीरे-धीरे अपनी आत्म-गरिमा भी खोने लगते हैं।
आत्म-सम्मान सर्वोपरि है । सम्मान किसी से माँगने की चीज़ नहीं है, यह कमाया जाता है । भीड़ का हिस्सा बनना आसान है, लेकिन अपनी शर्तों पर अकेले खड़े होने के लिए साहस चाहिए। जो लोग आपके मूल्य को नहीं समझते, उनके जीवन में आपकी उपस्थिति का कोई अर्थ नहीं है। याद रखें, आपकी शांति और आपका स्वाभिमान किसी भी रिश्ते या दोस्ती से कहीं अधिक कीमती है। अकेले रहना दुखद नहीं है, बल्कि एक ऐसे रिश्ते में रहना दुखद है, जहाँ आपको हर दिन खुद को थोड़ा-थोड़ा मारना पड़े। इसलिए, साहसी बनें और उन रास्तों को छोड़ दें, जहाँ आपकी कद्र नहीं है।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

