Friday, April 17, 2026
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दुःख मुक्ति का आन्दोलन

26 जनवरी 1950 से भारत देश मे लोकतंत्रात्मक व्यवस्था लागू है।SC,ST, OBC व GENERAL वर्गों के नागरिकों के लिए निर्धारित नियम भी लागू है। परन्तु SC,ST वर्गों के नागरिकों के अधिकार और कर्तव्य तथा पर्याप्त प्रतिनिधित्व/आरक्षण पर समाजिक, धार्मिक,राजनीतिक,आर्थिक शौषण तथा तिरस्कार दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है।संसद (व्यावस्थापिका कार्यपालिका, न्यायपालिका) भी कोई जिम्मेदारी से कार्य नही कर रही है।SC,ST वर्गों के नागरिकों को संविधान मे अनुच्छेद 13/2,14,15/4,16/4,341/1,341/2,342/1,342/2 है। परन्तु फिर भी SC, ST वर्गों के नागरिकों को समानता, स्वतंत्रता, न्याय, बन्धुत्व के लिए दिन प्रतिदिन बढ़ता टकराव ही शेष रह जाता है। 2 अप्रैल 2018 SC,ST वर्गों के नागरिकों द्वारा किया गया जन आन्दोलन क्या कहा जा सकता है।SC,ST वर्गों के नागरिकों का न्यायपालिका के विरुद्ध अधिकारों को लेकर किया गया आन्दोलन हिंसक बना या बनाया गया। जिम्मेदारी किसकी है।
SC,ST वर्गों के नागरिकों द्वारा जन आन्दोलन को

   शहीद दिवस 
          या 
  शौर्य दिवस 
          या 
 हत्या दिवस 

क्या कहें? यही प्रश्न शेष रह जाता है।
“जिसने हत्या किया उन पर हाई कोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट द्वारा क्या कोई संज्ञान नही लिया गया”
यह शौध का विषय है।
SC, ST वर्गों के नागरिकों को अब भी समझ नही आ रहा है।देश के अन्दर चल क्या रहा है। डॉ भीमराव अम्बेडकर द्वारा धर्मान्तरण आन्दोलन क्यों चलाया गया था।अब इस प्रश्न पर विचार कर रहे हैं। परन्तु कार्य न के बराबर ही है।यदि SC, ST वर्गों के नागरिकों का समूह जनसंख्या आधार पर भी बहुत अधिक संख्या मे हैं।परन्तु प्रोपोगेंडा और नीजि हित लाभ लेकर जो जन जाग्रति का कार्य कर रहे।सबसे अधिक वही जिम्मेदार है।
जागरूक नागरिक ही सभ्य समाज का निर्माण कर सकता हैं।परन्तु SC,ST वर्गों के जागरूक नागरिक द्वारा समाज को प्रोपोगेंडा कर रहे हैं। क्या यह प्रश्न शेष नही है।2 अप्रैल 2014 जन आन्दोलन पर फायरिंग कर हत्या क्यों, कैसे किया गया था।यह प्रश्न भी शोधकर्ताओं द्वारा करना चाहिए था।
क्या यह जातिवाद है।यदि यह जातिवाद है।तब प्रश्न शेष रह जाता है।जातिवाद क्यों,कौन,कैसे कर रहे हैं।यह प्रश्न ही शेष रह है।जाति किस धर्म का आधार है।जब तक ज्ञात नही है।तब तक कुछ भी हो सकता है।जब धर्म की जानकारी हो जाता है।तब प्रश्न शेष रह जाता है।कि ऐसे धर्म की क्या SC,ST वर्गों के नागरिकों को आवश्यकता है।
जागरूक नागरिक बनाना ही देश को मजबूत करना है।

जागरूक रहें।

सबका कल्याण हो।

लेखक :परवेश कुमार सहारनपुर उत्तर प्रदेश

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