मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
✍️✍️
जब तक कोई वस्तु या इंसान गतिशील है, सक्रिय है और अपना काम कर रहा हैं, तभी तक समाज और परिवार में उसकी कीमत और पहचान है। एक पुरानी गाड़ी भी अगर चल रही है, तो वह ‘गाड़ी’ कहलाती हैं क्योंकि वह अपने उद्देश्य (सफर) को पूरा कर रही है। इसीलिए तो शरीर रूपी गाड़ी पर कहा गया है कि चलती का नाम गाड़ी है और खाट में बैठ जाए तो खटारा है। यह कहावत हमें सिखाती हैं कि सक्रियता ही अस्तित्व का प्रमाण है। वही गाड़ी जब रुक जाती है, काम करना बंद कर देती है और सिर्फ एक जगह खड़ी होकर धूल फांकने लगती है, तो उसे ‘खटारा’ कह दिया जाता है। यहां ‘खाट’ आलस्य और ठहराव का प्रतीक है।
जब कोई मशीन या व्यक्ति अपनी क्षमता का उपयोग करना छोड़ देता हैं और आराम (खाट) को ही अपना लक्ष्य बना लेता है तो वह समाज और स्वयं के लिए अनुपयोगी हो जाता है । दुनिया केवल परिणाम और गति को सलाम करती है। ‘चलते’ रहना ही अस्तित्व की पहचान है, और ‘खाट’ पकड़ लेना पतन की शुरुआत है। इसलिए, जीवन में अगर सम्मान व उपयोगिता बनाए रखनी है, तो खुद को स्वस्थ रखकर खटारा होंने से बचाना होगा और प्रगति का पहिया घुमाते रहना होगा ।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

