Friday, April 17, 2026
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हिमाचल प्रदेश स्कूल मिड डे मिल वर्कर यूनियन की बैठक आयोजित | 

ठाकुर दास भारती मंडी हिमाचल प्रदेश | हिमाचल प्रदेश स्कूल मिड डे मील वर्कर यूनियन संबंधीत सीटू की जिला कमेटी की बैठक ताराचंद भवन मंडी में हुई, बैठक की अध्यक्षता जिला उपाध्यक्ष संतोष कुमारी ने की, बैठक का संचालन जिला सचिव ललिता कुमारी ने किया, बैठक में सीटू राज्य महासचिव प्रेम गौतम और यूनियन के जिला प्रभारी गुरदास वर्मा भी उपस्थित रहे। बैठक में जिला के 10 शिक्षा खंडों के कमेटी सदस्य ने भाग लिया। बैठक में चर्चा की गई कि मिड डे मील कार्यकर्ता का केंद्र सरकार की तरफ से पिछले 12 सालों में एक रूपये की भी बढ़ोतरी नहीं की गई जो बहुत ही शर्म की बात है, जो भी केंद्र सरकार ₹1000 देती भी है वह भी तीन से पांच माह में दिया जाता है। उसी प्रकार प्रदेश की सरकार जो 4000 रूपये देती है वह भी चार -पांच माह बाद दिया जाता है, जिसमें से छुट्टियों का पैसा काट दिया जाता है। इसके अलावा पूरे जिला में एक समान रूप से मानदेय नहीं दिया जाता है, कहीं 2800 रुपए कही ₹3500 कहीं ₹2500 देते है, जिससे वर्करों को यही पता नहीं चलता है कि हमें किस महीने में कितना मानदेय मिला जो एक चिंता का विषय है। इसके अलावा मिड डे मील वर्कर को 12 माह के बजाय 10 माह का ही वेतन दिया जाता है, जिसके लिए यूनियन माननीय उच्च न्यायालय गई थी और 2019 में फैसला आया था कि एम डी एम वर्कर को भी 12 माह का वेतन दिया जाए, लेकिन उस वक्त की जयराम सरकार कोर्ट के डबल बेंच में गई और कहां की हमारे पास इन वर्कों को 12 माह का वेतन देने के लिए पैसे नहीं है, और फिर यूनियन भी डबल बैच में लड़ी और दोबारा फैसला आया कि एम डी एम वर्कर को 12 मा का वेतन दिया जाये यह फैसला 2022 में आया। लेकिन इसके बाद सरकार बदली और सुख्खू जी के नेतृत्व में सरकार बनी उन्होंने तो बेशर्मी की हद की बात कर दी और ये उच्च न्यायालय को छोड़कर सर्वोच्च न्यायालय गई कि हमारे पास एम डी एम को 12 माह वेतन देने के लिए पैसे नहीं है जबकि पक्ष और विपक्ष हर साल अपना पैसा बढ़ाते हैं उसे वक्त उनके पास पैसे आ जाते हैं, जिससे ये इन वरर्कों का शोषण कर रहे हैं, जो एक चिंता का विषय है। इसलिए अब यूनियन भी सुप्रीम कोर्ट में 12 माह का वेतन लेने के लिए कैस कर रही है। एम डी एम वर्कर को साल में एक भी छुट्टी का प्रावधान नहीं है, यदि उनके घर में कोई जरूरी काम हो या कोई घटना हो जाए या खुद बीमार हो जाए तो इनको दिहाड़ी पर खाना बनाने के लिए किसी को भेजना पड़ता है जो ₹600  दिहाड़ी लेता है खुद की दिहाड़ी डेढ़ सौ रुपए और उनका ₹600 देना पड़ता है जो एक चिंता का विषय है। एम डी एम वर्कर पिछले 22 सालों से कम कर रहे हैं और स्कूल में बच्चों की संख्या कम होने पर एक वर्कर को निकाल दिया जाता है। इससे वर्कर में भी भारी रोष है। इसके अलावा मिड डे मील वर्कर से स्कूल में खाना बनाने के अलावा और भी काम करवाया जाता है जो इसके दायरे में नहीं है। इसलिए बैठक में निर्णय लिया गया की 22 जून 2026 को पूरे प्रदेश का एम डी एम कर्मी हड़ताल पर जाएगा और शिमला सचिवालय का घेराव करेगा जिसमें मंडी जिला से 500 वर्कर भाग लेंगे। अगर सरकार फिर भी नहीं मानी तो हड़ताल को और भी बढ़ाया जाएगा। अब एम डी एम वर्कर आर पार की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है। बैठक में रीना देवी, दमोदरी देवी, तारा देवी, व्यास देवी, उमा देवी, सीमा देवी, लज्जा देवी, गीता देवी, पवना, अनुराधा, कांता, गायत्री, सीमा, गीता, रीना, भामा सहित अन्य कमेटी सदस्यो ने हिस्सा  लिया।

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