Tuesday, September 29, 2026
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समझदार की चुप्यी और नासमझ की मुखरता ही है समाज और परिवार के विनाश का कारण

मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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एक स्वस्थ समाज और परिवार तभी चलता है, जब सही को सही और गलत को गलत कहने का साहस हो। जब समझदार लोग विवाद से बचने के लिए या ‘मौन रहने’ को अपनी महानता मान लेते हैं, तो वे अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट जाते हैं, उनकी यही चुप्पी नासमझों को यह भ्रम देती है कि वे सही हैं । समझदार की यही चुप्यी और नासमझ की मुखरता समाज और परिवार के विनाश का कारण है।
जब परिवार में बड़ों की सलाह के बजाय अविवेकपूर्ण बातें सुनी जाने लगती हों तो संस्कार और परंपराएं कमजोर पड़ जाती हैं । इसलिए समाज और परिवार की रक्षा के लिए समझदार लोगों का बोलना अनिवार्य है। समझदारी केवल ज्ञान होने में नहीं, बल्कि सही समय पर सही बात कहने में है। चुप्पी कभी-कभी अपराध से भी बड़ी हो जाती हैं। यदि हम एक स्वस्थ समाज चाहते हैं, तो हमें समझदार की वाणी और नासमझ के मौन को प्रोत्साहित करना होगा ।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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