पत्रकार बुद्धप्रकाश बौद्ध की SLP स्वीकार, 25 मार्च तक जवाब दाखिल करने के निर्देश
नई दिल्ली/भिंड । व्हाट्सएप ग्रुप में की गई एक पोस्ट को लेकर दर्ज एफआईआर के मामले में पत्रकार बुद्ध प्रकाश बौद्ध को सुप्रीम कोर्ट से प्रारंभिक राहत मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने बौद्ध द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) को स्वीकार करते हुए मध्यप्रदेश शासन, दबोह थाना प्रभारी (TI) और राममोहन तिवारी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।यह मामला जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्जवल भुईयां की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया, जहां अदालत ने याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करने का आदेश दिया।जानकारी के अनुसार, पत्रकार बुद्ध प्रकाश बौद्ध ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त करने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि 26 सितंबर 2025 को एक व्हाट्सएप ग्रुप में की गई पोस्ट के बाद दबोह थाना प्रभारी के प्रेरित करने पर कुछ लोगों ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। बौद्ध का आरोप है कि यह कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण और रंजिशन कराई गई है।याचिका में यह भी स्पष्ट किया गया है कि संबंधित व्हाट्सएप पोस्ट “प्राचीन भारत में गौहत्या और गौमांसाहार” विषय से जुड़ी थी, जो “क्या बालू की भीत पर खड़ा है हिन्दू धर्म” नामक पुस्तक के अंशों पर आधारित थी। इन अंशों को शैक्षणिक एवं चर्चा के उद्देश्य से साझा किया गया था। इस पुस्तक के लेखक सुरेन्द्र कुमार शर्मा ‘अज्ञात’ हैं।मामले की सुनवाई के बाद 12 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर संज्ञान लेते हुए नोटिस जारी किया और सभी संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। अदालत ने निर्देश दिया है कि मध्यप्रदेश शासन, दबोह थाना प्रभारी और राममोहन तिवारी 25 मार्च 2026 से पहले अपना जवाब स्वयं या अपने अधिवक्ता के माध्यम से न्यायालय में प्रस्तुत करें।याचिकाकर्ता का कहना है कि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पत्रकारिता के अधिकारों के विपरीत है, इसलिए इसे निरस्त किया जाना चाहिए।बताया गया है कि इस मामले से संबंधित खबर देश के विभिन्न अखबारों, वेबसाइट्स और न्यूज पोर्टल्स पर भी प्रकाशित की गई है, जिसके बाद यह मामला व्यापक चर्चा में आ गया है।अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में आगे की सुनवाई संबंधित पक्षों के जवाब दाखिल होने के बाद होगी।

