मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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आप कितनी भी देर तक किसी पुरानी घटना पर पछतावा करें, वो घटना वैसी ही रहेगी। पछतावा सिर्फ आपको दुखी करता है, लेकिन अतीत को बदल नहीं सकता। भविष्य के बारे में लगातार चिंता करना या डरना, उसे बेहतर नहीं बनाता बल्कि, यह आपके वर्तमान के सुकून और ऊर्जा को छीन लेता है। सच्ची खुशी और बदलाव का रास्ता वर्तमान में है। आज आप जो फैसले लेते हैं, जो काम करते हैं, वही आपके भविष्य का निर्माण करते हैं। अतीत से सीखें और भविष्य की योजना बनाएं, लेकिन वर्तमान में पूरी तरह जिएं।
यह सुविचार हमें सिखाता है कि हमें अपने समय और ऊर्जा को उन चीज़ों पर लगाना चाहिए जिनका हम नियंत्रण कर सकते हैं और वो हैं । जीवन एक निरंतर बहती नदी की तरह है जिसमें अतीत, वर्तमान और भविष्य एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। ‘पछतावा अतीत को नहीं बदल सकता और चिंता भविष्य को नहीं सुधार सकती । यह कहावत हमें सिखाती है कि अतीत की यादों में खोए रहना या भविष्य के डर से घबराना व्यर्थ है। इन दोनों भावुक अवस्थाओं से दूर रहकर वर्तमान में जीना ही वास्तविक खुशी और प्रगति का मार्ग है।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

