मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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जीवन में ऐसे कई क्षण आते हैं, जब सच्चाई और न्याय के रास्ते पर चलना मुश्किल हो जाता है। हम जानते हैं कि हम सही हैं, हमारे विचार सही हैं, और हमारे कार्य सही दिशा में हैं। फिर भी, समाज में या अपने आसपास के माहौल में ऐसे लोग होते हैं, जो गलत होते हुए भी अपनी स्थिति, ताकत या चालाकी के कारण हम पर हावी होने का प्रयास करते हैं। जब हम अपने सही होने के बावजूद इन गलत लोगों के सामने झुकने को मजबूर हो जाते हैं तो यह एक भयानक हार होती है। इसलिए गलत लोगों से बदला लेने के बजाय, शांतिपूर्ण जीवन के लिए उनसे हार मान लेना और अपनी सही पहचान पर कायम रहना ही समझदारी है।
सही होते हुए भी झुकना एक जीत से ज़्यादा एक हार है। यह एक ऐसी हार है, जो हमें अंदर से तोड़ देती है। हालाँकि कभी-कभी शांति बनाए रखने या बड़ी लड़ाई से बचने के लिए झुकना ज़रूरी हो सकता है, लेकिन यह एक ऐसा मोड़ है, जो हमें अपनी सच्चाई के लिए लड़ने या परिस्थितियों को बदलने के तरीकों पर विचार करने के लिए प्रेरित करता है। अगर हम अपनी सही होने की भावना और आत्म-सम्मान को कभी नहीं छोड़ते हैं तो हमें भविष्य में जीत मिल सकती है। इस तरह, सही होकर भी झुकना एक आंतरिक हार है, लेकिन यह उस हार को स्वीकार करने या लड़ने की हमारी मानसिक स्थिति पर निर्भर करता है।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

