

मूकनायक/ कमलेश लवहात्रै
बिलासपुर
छत्तीसगढ़ मातृशक्ति संगठन की संयोजक आयुष्मति चंद्रकला तारंम ने अपनी बात रखते हुए कहा कि वर्तमान सरकार हमारे ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर को खत्म करने का कृत्य कर रही है। लेकिन हम ऐसा होने नहीं देंगे। महिला शक्ति जाग चुकी है। इनके पाखंड का खात्मा होकर रहेगा। राजेंद्र परगनिहा जी ने आंदोलन को समर्थन देते हुए बौद्धों की विरासत को हड़पने का आरोप बिहार सरकार पर लगाया। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि यहां से पण्डे,महंतो को हटाना होगा और बौद्धों की धरोहर बौद्धों को सौंपना होगा। मातृशक्ति संगठन से चंद्रकला तारंम ,ममता वर्मा, कनकलता नाग,पूर्णिमा ऊके,निर्मला चतुर्वेदी,प्रतिमा दामले,उमा सिंह, उपस्थित रहे और पूरा दिन धरने पर बैठे । सभा को अशोक मेश्राम और रामाराव ढोक ने संबोधित किया।
दुर्ग/भिलाई के समस्त बौद्ध संगठन बिहार के बोधगया महाबोधी महाविहार से बीटी 1949 एक्ट निरस्त करने और महाबोधी महाविहार को ब्राह्मणवाद से मुक्त करने के लिए ऑल इंडिया बुद्धिष्ट फोरम छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष सविता बौद्ध संकल्पी उर्फ सामनेरी खेमा के नेतृत्व और मार्गदर्शन में एवं समता सुरक्षा सेना के संरक्षण में सामनेरी विशाखा ,सामनेरी संघप्रिया भिक्षुणी संघ , ऑल इंडिया बुद्धिष्ट फोरम छत्तीसगढ़ और दुर्ग/भिलाई आंदोलन के नेतृत्वकर्ता, तन-मन-धन से जमीनी स्तर पर कार्य करने और श्रमदान करने वाले डॉ .अरविंद चौधरी,अनिल जोग,रामाराव ढोक,सुदेश कुमार,आशीष चौहान,महेंद्र बौद्ध,अल्का बौद्ध,जयश्री बौद्ध,करुणा भालाधरे,अर्चना वासनिक,रसिया सहारे,नीलिमा कांहेकर,काशी मेश्राम,महेंद्र चौहान,माधुरी रंगारी ,दिलीप रामटेके आदि सुबह से शाम तक धरने स्थल पर अपनी सेवाएं दे रहें है।आपका समर्पण और कड़ी मेहनत अवश्य ही रंग लाएगी और बीटी एक्ट 1949 रद्द होकर रहेगा ।आंदोलन के पहले दिन से अपनी ओजस्वी वाणी से आयुष्मान डॉ.अरविंद चौधरी सुदेश कुमार और अनिल जोग पहले दिन से बोधगया महाबोधी महाविहार मुक्ति आंदोलन की वर्तमान वस्तुस्थिति पर अपने जोशीले वक्तव्य से लोगों को जागृत कर रहे है। हमारी केवल दो ही मांगे पहली बीटी एक्ट 1949 रद्द हो और महाबोधि महाविहार गैर बौद्धों से मुक्त होना चाहिए । अन्यथा यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक बिहार सरकार बीटी एक्ट 1949 खत्म नहीं कर देती और महाबोधी महाविहार प्रबंधन बौद्धों को सौंप नहीं देती। प्रियदर्शी सम्राट अशोक के अनेक बौद्ध स्थलों को मनुवादियों ने अतिक्रमण और हड़प करके रखा है।
इस अवसर पर साक्षी बौद्ध,श्रेया,रिया ,,मंजू डोंगरे,प्रमिला रंगारी,योगेश सहारे,,लतिका खांडेकर ,खुशबू बौद्ध,अष्टशिला वासनिक, बेनू गजभिए,राजू गेडाम भूषण नाडिया,ज्योति गेडाम , लाला रंगारी,यशोधरा रामटेके,आयुष रामटेके,कविता रंगारे,घनश्याम लांजेवार ,आनंद रामटेके, आदित्य ऊके, सुखवंता घरडे,कविता रंगारे ,सार्थक,गौरीशंकर घरड़े, प्रीति घरड़े,विनोद मेश्राम,एच व्ही बौद्ध,पूर्णिमा ऊके,सत्यम गजभिए, राजकुमार साहू,ऊषा वैद्य,लोकेंद्र सोनटेके,जेडी राउत,शालू दामले,पूनम ढोक,उज्वला लवहाले,साधना नागवंशी,ममता भावे,स्वाति ऊके ज्योति गेडाम,शैलेश चाहंदे,संघमित्रा धारगावे अंबागढ़ चौकी,अशोक कुमार,तेजराम मंजू डोंगरे,विश्वासा ठवरे,विनोद टेंभरे,एच पी नंदागवली,लतिका खांडेकर,दिलीप रामटेके भूमिका,नेहा,द्वारिका रामटेके,,ने गरिमामई उपस्थिति दर्ज कराई। इंदु ढोक ने धरना प्रदर्शन में जलपान की सेवाएं दी। प्रतीक्षा सहारे,सृष्टि,सहारे रिया,श्रेया,श्रेयस ,अक्षिता, आयशा और प्रज्ञा बच्चों ने नारों के माध्यम से बिहार सरकार से मांग की है।

