मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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ज़िंदगी में कई बार ऐसे हालात उत्पन्न हो जाते हैं, जिसकी हमने कल्पना भी नहीं की होती, ऐसे में इंसान घबरा जाता है, उसे समझ नहीं आता कि अब क्या करें, लेकिन कुछ लोग बिना डरे हिम्मत से ऐसे हालात का सामना करते हैं। दरअसल, ज़िंदगी की आधी से ज़्यादा मुश्किलें तभी हल हो जाती हैं, जब उससे डरने की बजाय हम साहसपूर्वक उसका सामना करने की ठान लें। साहस डर का अभाव नहीं है, बल्कि डर के बावजूद काम करने की इच्छाशक्ति है। जब हम अपने डर को पहचानते हैं, उसे स्वीकार करते हैं, और फिर भी आगे बढ़ते हैं, तो हम अपने भीतर के साहस को जगाते हैं।
डर हर किसी को लगता है, लेकिन इस डर को जीतकर अपने लक्ष्य को आगे बढ़ना ही ज़िंदगी है। जिस काम को करने से डर लगता है, एक बार उसे करने का साहस जगा ही लीजिए। जीवन भर का डर दूर हो जाएगा। जो मुकद्दर में है, उसे आप तो क्या, कोई अपाहिज भी पा लेगा, आप तो उसे पाकर दिखाइए, जो आपके मुकद्दर में नहीं है। भाग्य से ज्यादा मेहनत पर विश्वास रखिए। भाग्य लिफ्ट की तरह है और मेहनत सीढ़ियों की तरह। लिफ्ट कभी बंद भी हो सकती है, परंतु सीढ़ियां ऊंचाई की तरफ ले जाती रहती है और रिश्तों में दरार आ गई हो तो दरार मिटाइए, रिश्ते नहीं । नाखून बढ़ जाने पर नाखून ही काटे जाते हैं, पूरी अंगुलियां नहीं….
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

