मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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प्रेम की शुरुआत आमतौर पर आकर्षण, मनोयोग्यता और खुशी की भावनाओं से होती है. जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति के प्रति आकर्षित होता है, तो उसे देखने या साथ समय बिताने की इच्छा महसूस होती है । इसके साथ ही, उस व्यक्ति के साथ मनोयोग्यता और खुशी की भावना भी होती है । यह भावनाएं धीरे-धीरे प्यार में बदल सकती हैं । जब प्रेम करने वाले के दिल में गलतफहमी की दीवार पैदा हो जाती है और प्रेम में शक को बीच में घुसने की जगह मिल जाती हैं, तभी प्रेम का अंत हो जाता हैं ।
इसलिए प्रेम से ही अपने हर दिन की शुरुआत करें और प्रेम से ही हर दिन का समापन करें । प्रेम को स्वभाव बनाएं, शब्द नहीं । प्रेम को पूजा बनाएं, करबद्धता नहीं। प्रेम को सौभाग्य माने, हस्तरेखा नहीं। प्रेम को संसार समझे, कागज का नक्शा नहीं। सामान्य गलतियों को नजरंदाज करें । सभी से प्रेम करें और परस्पर सहयोगी बनकर सभी की सेवा करें क्योंकि प्रेम में ही निःस्वार्थता, समर्पण, विश्वास और सम्मान की भावना होती है, जबकि क्षमता से अधिक प्रेम, शक और गलतफहमी होने पर नफरत में प्रेम का अंत हो जाता है ।
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

