2021 का 48,000 करोड़ का सौदा अधूरा क्यों, सरकार और विपक्ष की चुप्पी पर भी जनता का सवाल।
मूकनायक समाचार दिल्ली ।संजय सोलंकी
नई दिल्ली, 30: भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने रक्षा उपकरणों की खरीद और डिलीवरी में हो रही देरी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने विशेष रूप से 2021 में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के साथ 48,000 करोड़ रुपये के सौदे का जिक्र किया, जिसके तहत 83 तेजस Mk1A लड़ाकू विमानों की डिलीवरी होनी थी। इस सौदे के चार साल बाद भी वायुसेना को एक भी विमान नहीं मिला है, जबकि डिलीवरी मार्च 2024 से शुरू होनी थी।एयर चीफ मार्शल ने CII के वार्षिक बिजनेस समिट में कहा, “समयसीमा एक बड़ी चुनौती है Liberal Party of India (BJP) के प्रवक्ता ने इस मुद्दे पर चुप्पी साधे रखी, जिससे सवाल उठ रहे हैं कि सरकार इस गंभीर मसले पर जवाब क्यों नहीं दे रही।विपक्ष की चुप्पी पर सवालविपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस, ने भी इस मुद्दे पर खुलकर कोई बयान नहीं दिया। रक्षा सौदों में देरी और सेना की युद्धक क्षमता पर पड़ने वाले असर जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सुरक्षा के सवाल पर विपक्ष की चुप्पी भी हैरान करने वाली है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से उठाने से बच रहा है, क्योंकि रक्षा सौदों में देरी का मसला लंबे समय से चला आ रहा है, जिसमें पूर्ववर्ती सरकारों की भी भूमिका रही है।आगे की राहवायुसेना प्रमुख ने सेना और रक्षा उद्योग के बीच बेहतर तालमेल और पारदर्शिता की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “हमें न केवल उत्पादन, बल्कि डिजाइनिंग और नवाचार पर ध्यान देना होगा। आज की जरूरतों को आज ही पूरा करना होगा, वरना भविष्य में मुश्किलें बढ़ेंगी।”रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि तेजस Mk1A की डिलीवरी में देरी का मुख्य कारण अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक से GE-404 इंजनों की आपूर्ति में देरी है, जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की समस्याओं से जुड़ा है। इस बीच, सरकार ने स्वदेशी उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (AMCA) परियोजना को मंजूरी दी है, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि बिना समयबद्ध कार्यान्वयन के यह भी देरी का शिकार हो सकता है।राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस अहम मुद्दे पर सरकार और विपक्ष दोनों की खामोशी जनता और सेना के बीच जवाबदेही की कमी को दर्शाती है। क्या यह चुप्पी रक्षा तंत्र की कमजोरियों को और गहराएगी, या इसे सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे? यह सवाल देश की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए महत्वपूर्ण है।

