Saturday, October 24, 2026
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हिंडौन में बौद्ध रीति-रिवाज से हुआ आदर्श विवाह, पाखंड-मुक्त और दहेज-मुक्त शादी बनी चर्चा का विषय

मूकनायक / रिपोर्टर धर्मवीर गौतम / हिंडौन सिटी

‘बिन फेरे हम तेरे’ की परंपरा के साथ शेर सिंह और आरती ने रचाया विवाह; सादगी, सामाजिक समानता और फिजूलखर्ची से मुक्ति का दिया संदेश

हिंडौन सिटी। क्षेत्र में बौद्ध रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुआ एक आदर्श विवाह इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। गुलपाड़िया और गुनसारिया परिवारों की आपसी सहमति से आयोजित इस विवाह समारोह में पाखंड-मुक्त, दहेज-मुक्त और मंत्र-मुक्त विवाह परंपरा को अपनाते हुए समाज को सादगी, समानता और सामाजिक जागरूकता का संदेश दिया गया। विवाह में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। बौद्ध समाज और जाटव समाज के लोगों की उपस्थिति ने आयोजन को सामाजिक एकजुटता का स्वरूप प्रदान किया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, धंधावली निवासी मानसिंह बौद्ध के पुत्र शेर सिंह का विवाह देवलन, पीलुवा निवासी परिवार की पुत्री आरती के साथ संपन्न हुआ। दोनों परिवारों की सहमति से आयोजित इस विवाह में पारंपरिक फिजूलखर्ची से दूर रहकर बौद्ध रीति-रिवाजों और सामाजिक मूल्यों को प्राथमिकता दी गई। ‘बिन फेरे हम तेरे’ की अवधारणा के अनुरूप संपन्न हुए इस विवाह ने वैवाहिक परंपराओं को लेकर नई सामाजिक चर्चा को जन्म दिया है।

बौद्ध परंपरा के अनुरूप संपन्न हुआ विवाह समारोह

विवाह समारोह बौद्ध भिक्षुणी हेमाशीला के मार्गदर्शन एवं अनुसरण में संपन्न हुआ। आयोजन में बौद्ध विचारधारा के अनुरूप सादगी, नैतिकता, आपसी सहमति और समानता जैसे मूल्यों को प्रमुखता दी गई। विवाह में शामिल लोगों ने इस पहल को ऐसी सामाजिक परंपरा के रूप में देखा, जिसमें विवाह को अनावश्यक खर्च और दिखावे के बजाय दो व्यक्तियों तथा उनके परिवारों के आपसी विश्वास और जिम्मेदारी से जोड़कर देखा जाता है।

बौद्ध रीति-रिवाजों से होने वाले विवाहों में सामान्यतः बुद्ध एवं धम्म के प्रति सम्मान, त्रिशरण-पंचशील का स्मरण, नैतिक जीवन का संकल्प, वर-वधू की सहमति तथा परस्पर सम्मान और जिम्मेदारियों पर जोर दिया जा सकता है। हालांकि, अलग-अलग बौद्ध समुदायों और आयोजनों में विधियों का स्वरूप भिन्न हो सकता है। इस आयोजन में अपनाई गई विशिष्ट रस्मों का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं होने के कारण समारोह की प्रमुख विशेषता सादगीपूर्ण और पाखंड-मुक्त विवाह परंपरा रही।

दहेज और फिजूलखर्ची से दूरी, समाज को दिया संदेश

इस विवाह की खास बात यह रही कि इसे पाखंड-मुक्त, दहेज-मुक्त और मंत्र-मुक्त आदर्श विवाह के रूप में प्रस्तुत किया गया। ऐसे आयोजनों का उद्देश्य विवाह के नाम पर होने वाले अनावश्यक खर्च, दिखावे और आर्थिक दबाव को कम करने के साथ समाज में समानता एवं जागरूकता को बढ़ावा देना है।

विवाह समारोह के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि विवाह की सार्थकता महंगे आयोजन, आडंबर या फिजूलखर्ची में नहीं, बल्कि आपसी सहमति, सम्मान, विश्वास और पारिवारिक जिम्मेदारियों के निर्वहन में है। सादगीपूर्ण विवाह से समय और संसाधनों की बचत के साथ परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को भी कम किया जा सकता है।

प्रदेशभर से पहुंचे लोग, सामाजिक एकजुटता का दिखा स्वरूप

समारोह में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से बौद्ध समाज और जाटव समाज के सैकड़ों लोगों के शामिल होने की जानकारी है। विवाह केवल पारिवारिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक सुधार और वैकल्पिक विवाह परंपराओं को लेकर चर्चा का माध्यम भी बना। आयोजन में शामिल लोगों के बीच सादगीपूर्ण विवाह, दहेज प्रथा से दूरी और सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन जैसे विषय चर्चा के केंद्र में रहे।

इस अवसर पर मूकनायक के राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा भी पहुंचे। उनकी उपस्थिति सहित प्रदेशभर से आए लोगों की सहभागिता ने आयोजन को व्यापक सामाजिक पहचान दिलाई। हिंडौन सिटी और आसपास के क्षेत्रों में इस विवाह की चर्चा हो रही है।

सामाजिक बदलाव की दिशा में एक पहल

आज के दौर में विवाह समारोहों पर बढ़ते खर्च और सामाजिक दिखावे के बीच इस तरह के आयोजन एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करते हैं कि क्या विवाह को अधिक सरल, समानतापूर्ण औरbd आर्थिक दबाव से मुक्त नहीं बनाया जा सकता? शेर सिंह और आरती का यह विवाह इसी विचार को सामने लाता है।

गुलपाड़िया और गुनसारिया परिवारों की सहमति से संपन्न इस आयोजन ने सादगीपूर्ण विवाह की परंपरा को चर्चा में ला दिया है। यदि समाज में ऐसे प्रयासों को प्रोत्साहन मिलता है, तो विवाह के नाम पर होने वाली फिजूलखर्ची कम करने, दहेज जैसी कुप्रथाओं के विरुद्ध जागरूकता बढ़ाने और सामाजिक समानता को मजबूत करने की दिशा में सकारात्मक वातावरण बन सकता है।विवाह दिखावे का नहीं, आपसी सम्मान, सहमति और जिम्मेदारी का बंधन है।

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