मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
नई दिल्ली
दलितों वंचितों को न्याय दिलाने और महिलाओं को जागरूक करने के लिए सीमा गौतम ने उ.प्र.मे बड़ा काम किया इसलिए इस अवार्ड से सम्मानित किया गया, यह गोरखपुर क्षेत्र के लिए भी गौरवान्वित होने का सम्मान है
मार्था फेरल फाउंडेशन द्वारा यह सम्मान दिल्ली में आयोजित एक भव्य समारोह में दिया गया जिसमें देश के तमाम बड़े बुद्धिजीवी, राइटर, जन संस्थानों और सामाजिक संगठनों के महत्वपूर्ण और गणमान्य जनों की उपस्थिति रही
10वाँ मार्था फैरल पुरस्कार समारोह शनिवार, 26 सितंबर 2026 को विश्व युवक केंद्र, नई दिल्ली में आयोजित किया गया। यह वार्षिक पुरस्कार उन व्यक्तियों और संस्थाओं को सम्मानित करता है जो महिला सशक्तिकरण और गरीब कमजोर वर्गों को जागरूक करने के लिए काम कर रहे हैं।
इस वर्ष मार्था फैरल फाउंडेशन को देश भर से 139 व्यक्तिगत और 117 संस्थागत नामांकन प्राप्त हुए। पुरस्कार इन श्रेणियों में दिए गए:
मोस्ट प्रॉमिसिंग इंडिविजुअल
विशेष जूरी पुरस्कार – व्यक्तिगत
बेस्ट आर्गेनाईजेशन फॉर जेंडर इक्वलिटी,
विशेष जूरी पुरस्कार – संस्था
व्यक्तिगत श्रेणी के 5 फाइनलिस्ट में से, महिला सशक्तिकरण और गरीब कमजोर वर्ग समानता के कार्य में उत्कृष्टता के लिए 10वें मार्था फैरल अवार्ड का मोस्ट प्रॉमिसिंग इंडिविजुअल पुरस्कार सीमा गौतम को मिला।
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर की दलित सामाजिक कार्यकर्ता सीमा गौतम दलित महिलाओं और जातिगत शोषण व हिंसा से पीड़ित महिलाओं के साथ काम करती हैं।
अंबेडकर पाठशाला सेवा ट्रस्ट के माध्यम से वे महिलाओं और परिवारों को कानूनी सहायता, मुआवज़ा, सरकारी सेवाएँ, शिक्षा और आजीविका के अवसर दिलाने में मदद करती हैं। उन्होंने भूमि अधिकार आंदोलन का नेतृत्व भी किया, जिसमें लगभग एक लाख महिलाएँ, पुरुष और युवा जुड़े, और करीब 800 परिवारों को उनके भूमि अधिकारों से जुड़े सरकारी आदेश मिले। उनका काम ज़मीन, सम्मान और न्याय को जोड़कर हाशिये पर रहने वाली महिलाओं के अधिकार और सशक्तिकरण को आगे बढ़ाता है।
उन्हें यह पुरस्कार भारती एयरटेल फाउंडेशन की पूर्व सीईओ और मोज़ैक इम्पैक्ट की संस्थापक ममता सैकिया ने प्रदान किया।
इस अवसर पर सीमा गौतम ने सबका आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “यह अवार्ड, सम्मान मेरी यात्रा का अंत नहीं, बल्कि महिलाओं और हाशिये के समुदायों की आवाज़ को और बुलंद करने की नई ज़िम्मेदारी है। इससे मेरा यह विश्वास और मज़बूत हुआ है कि समुदाय के नेतृत्व में लगातार किया गया काम सबसे कठिन संघर्षों को भी सार्थक बदलाव में बदल सकता है।”

