Tuesday, September 29, 2026
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धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत प्रदेश के 160 गांवों का होगा चयन

प्रत्येक ग्रामसभा को 15 लाख रुपये की स्वीकृति, सामुदायिक वन संसाधन संरक्षण एवं प्रबंधन को मिलेगा बढ़ावा

रायपुर, 3 अगस्त 2026। अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम-2006 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार ने धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत प्रदेश के 160 गांवों का चयन करने का निर्णय लिया है। चयनित ग्रामों में सामुदायिक वन संसाधन (सीएफआर) के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रबंधन के लिए सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन योजना (सीएफआरएमपी) तैयार कर लागू की जाएगी। अभियान के अंतर्गत प्रत्येक ग्रामसभा को योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 15 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है।

आदिम जाति विभाग ने इस संबंध में सभी संबंधित जिलों के कलेक्टरों को पत्र जारी कर निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक चयनित ग्रामसभा में सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समिति का गठन किया जाए। यह समिति ग्रामसभा के माध्यम से योजना के संचालन एवं क्रियान्वयन की जिम्मेदारी निभाएगी। इसके लिए ग्रामसभा के नाम से राष्ट्रीयकृत बैंक में सिंगल करंट अकाउंट भी खोला जाएगा।

विभाग ने जिलों को क्लस्टर आधारित एवं परस्पर जुड़े क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए 160 गांवों का चयन करने के निर्देश दिए हैं, ताकि योजना का प्रभावी संचालन और बेहतर परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें।

योजना के सफल संचालन के लिए राज्य सरकार तकनीकी सहयोगी संस्थाओं, सिविल सोसायटी संगठनों तथा स्थानीय संस्थाओं का सहयोग भी ले सकेगी। ग्रामसभा के प्रस्ताव और विधिवत अनुमोदन के बाद ये संस्थाएं सामुदायिक वन संसाधन संरक्षण एवं प्रबंधन योजना तैयार करने, उसके क्रियान्वयन तथा निगरानी में सहयोग प्रदान करेंगी।

आदिम जाति विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस पहल से वन अधिकार अधिनियम-2006 का जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा। साथ ही ग्रामसभाओं की भूमिका मजबूत होगी तथा सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण, संवर्धन और आजीविका विकास को नई गति मिलेगी।

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