Thursday, July 16, 2026
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सोनम वांगचुक की बिगडती तबियत के कारण समर्थकों में चिंता का माहौल

मूकनायक समाचार

17 दिनों से भूख हडताल पर बैठे सोनम वांगचुक की तबियत के चलते समर्थकों में चिंता का माहौल छा गया है। बिगडती सेहत को देखते हुए हज़ारों समर्थक अनशन समाप्त करने की अपील कर रहे हैं, किन्तु सोनम वांगचुक अपने फैसेले पर अडे रहे हैं।  59 वर्षीय वांगचुक अपना फैसला बदलना नहीं चाह रहे हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर कोंकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने आंदोलन शुरू किया था। सीजेपी की मांग है कि भारत में शिक्षा व्यवस्था में सुधार हो। कोंकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन के द्वारा मांग कि है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत इस्तीफ़ा दें। आंदोलनकारियों का कहना है कि मई की शुरुआत में मेडिकल प्रवेश परीक्षा (नीट) का प्रश्नपत्र लीक होने के बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी और इसकी ज़िम्मेदारी शिक्षा मंत्री को लेनी चाहिए। जबकि धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफ़ा देने से इनकार कर दिया है। उनके अनुसार सीजेपी और उसके समर्थकों को “विघटनकारी तत्वों की बी-टीम” बताया है और उनका कहना है कि उन्हें देश की तरक्की पर भरोसा नहीं है। 28 जून को आंदोलन में शामिल हुए लद्दाख के इंजीनियर, शिक्षाविद् और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे है। 

वांगचुक ‘सोनम सर’ के नाम से लोकप्रिय है और सम्मानित सार्वजनिक शख्सियतों में उनका नाम है। वह भारत ही नहीं दुनियाभर में विख्यात है। मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले वांगचुक ने लद्दाख को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में मदद करने के कई उपाय सुझाए और उन्हें विकसित भी किया।  ‘आइस स्तूप’ विकसित करने में सोनम वांगचुक का नाम अधिक लिया जाता है, यह बौद्ध स्तूपों से प्रेरित शंकु के आकार का कृत्रिम हिम स्तूप है, इसमें सर्दियों में पानी जमा होता है और वसंत के अंत में जमा हुआ पानी किसानों को उपयोग में आता है।  सोनम वांगचुक को 2018 में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मान दिया था। वह एशिया का सर्वोच्च सम्मान है। सुपरहिट बॉलीवुड फिल्म ‘थ्री इडियट्स’ के प्रमुख किरदार की प्रेरणा भी वही रहे हैं। लद्दाख में विरोध प्रदर्शनों को भडकाने के आरोप में उन्हें गिरफ्तार कर 170 दिन जेल में रखा था। इसके बाद सरकार ने आरोप वापस लेकर उन्हें रिहा कर दिया था। सोनम वांगचुक 24 दिनों से बैठे है और 16 दिनों से भूख हडताल पर है। फिर भी सरकार ने न तो कोई हस्तक्षेप किया और न ही बातचीत शुरू की है।

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