मूकनायक समाचार । सूरत
सूरत जिला के पलसाणा तहसील के अंत्रोली गांव क्षेत्र में कडोदरा जीआईडीसी पुलिस थाने में वाहन चैकिंग के दौरान डिटेईन किए वाहनों को छुडवाने के लिए सूरत आरटीओ कचहरी के अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम के फर्जी सही-सिक्का वाली नकली रसिदों बनाकर सरकार के साथ धोखाधडी करने वाले नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है।
कडोदरा जीआईडीसी पुलिस थाने में दिनांक 9-7-2026 को एक शख्स रविन्द्र साहेबराव वानखेडे अपनी ओटो रिक्षा छुडवाने के लिए आरटीओ का जुर्माना भरकर स्लीप के साथ आया था। पुलिस स्टाफ ने वह रसीद पर दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन किया उस दौरान आरटीओ के ओनलाईन रिकार्ड पर डिजिटल स्लीप दिखने की बजाय एक गुगल ड्राईव की पीडीएफ की फाईल खुली थी। पुलिस को संदेह होने पर सूरत आरटीओ कचहरी में अन्य चार रसिदों की छानबीन करवाई। जिसमें खुलासा हुआ कि इस प्रकार का कोई दंड आरटीओ सूरत के खाते में जमा नहीं हुआ और रसीद आरटीओ कचहरी से ईश्यु ही नहीं की गई है। इसके बाद आरटीओ ने पीछले दो साल के समय के दौरान की रसिदों की जांच करने पर टोटल 60 वाहनों की संदेहास्पद और फर्जी रसिद मिली। पुलिस की अधिक जांच में राज खुला कि अपराधियों ने वाहनचालकों व मालिकों के पास से आरटीओ कचहरी में जुर्माना भराने के बहाने करीब रुपये 5 लाख 18 हजार 500 की राशि प्राप्त कर ली थी। यह रुपये सरकारी खाते में जमा करवाने की बजाय अपराधियों ने खुद ही आर्थिक फायदा के लिए युज कर लिए थे और वाहन मालिकों को बोगस सही सिक्का वाली फर्जी रसिदों के आधार पर पुलिस स्टेशनों में से वाहन छुडवा लिए थे। जिससे सरकारी खजाने में आर्थिक काफी नुकशान हुआ है। इस मामले वाहन मालिकों की पूछताछ और जांच अंत में लिंबायत और अमरोली क्षेत्र के तीन मुख्य एजन्टों के नाम सामने आए है। कडोदरा जीआईडीसी पुलिस ने यह तीनों शख्सों के खिलाफ धोखाधडी और सरकारी दस्तावेजों को गेरकानूनी रूप से फर्जी बनाने का मामला दर्ज कर अधिक जांच शुरू की है। यह फर्जी रसिदों के मामले में मोहसीन रेडीमनी (निवासी – मदीना मस्जिद के पास, लिंबायत), अकबर शेख (निवासी – मारुतिनगर, लिंबायत) और सुनिल शर्मा (निवासी – छापराभाठा, अमरोली) समाविष्ट है।

