
बारनावापारा अभयारण्य में मृत मिले तीन चीतलों की वैज्ञानिक जांच शुरू, ट्रैप कैमरों से बढ़ाई गई निगरानी
रायपुर, 9 जुलाई। बारनावापारा अभयारण्य में तीन चीतलों के मृत मिलने के मामले में वन विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी चीतलों का पोस्टमार्टम कराया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि मृत्यु के वास्तविक कारणों की पुष्टि वैज्ञानिक जांच और विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही की जाएगी।
वन विभाग के अनुसार 7 जुलाई को बारनावापारा वन परिक्षेत्र के पकरीद बीट स्थित कक्ष क्रमांक 127 के रामपुर चारागाह में नियमित गश्त के दौरान दो नर चीतल मृत अवस्था में मिले। शासकीय पशु चिकित्सकों द्वारा किए गए प्रारंभिक पोस्टमार्टम में दोनों चीतलों के गले पर आपसी संघर्ष के कारण चोट के निशान पाए गए। उनके शरीर पर किसी मांसाहारी वन्यजीव के हमले के संकेत नहीं मिले। हालांकि, मृत्यु के वास्तविक कारणों की पुष्टि विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही होगी।
इसके अगले दिन 8 जुलाई को उसी क्षेत्र में एक अन्य चीतल मृत मिला। प्रारंभिक जांच में उसके गले पर किसी हिंसक वन्यप्राणी के हमले के स्पष्ट निशान पाए गए। घटनास्थल पर चीतल के सभी अंग, सींग और खाल सुरक्षित मिले, जिससे शिकार की आशंका से इनकार किया गया है।
घटना के बाद वन विभाग ने क्षेत्र में निगरानी और गश्त बढ़ा दी है। वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए घटनास्थल पर ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। साथ ही वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में अनावश्यक हस्तक्षेप किए बिना सतत निगरानी की जा रही है।
वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वन्यजीवों की सुरक्षा और संरक्षण में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने घटना की निष्पक्ष, वैज्ञानिक एवं विधिसम्मत जांच कराने तथा तथ्य सामने आने पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अभयारण्यों में नियमित गश्त और निगरानी व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया है।
वन विभाग ने बताया कि बारनावापारा अभयारण्य में अधिकारी एवं कर्मचारी नियमित रूप से गश्त कर रहे हैं और वन्यजीवों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और वैज्ञानिक जांच के आधार पर मृत्यु के वास्तविक कारणों की पुष्टि होने के बाद आवश्यक आगे की कार्रवाई की जाएगी।

