
मूकनायक/रायपुर जिला ब्यूरो चीफ दुष्यंत सुरेश सांखरे रायपुर/छत्तीसगढ़
नगर निगम के प्री-मानसून नाला सफाई के दावे पूरी तरह हवा, घुटनों तक भरे गंदे पानी के बीच रहने को मजबूर वंचित वर्ग रायपुर: राजधानी रायपुर को ‘स्मार्ट सिटी’ बनाने के दावों और विज्ञापनों की जमीनी हकीकत को इस मानसूनी बारिश ने पूरी तरह से बेनकाब कर दिया है। नगर निगम और स्मार्ट सिटी लिमिटेड के अंदरूनी सूत्रों से मिली इनसाइड खबर के अनुसार, मानसून से पहले नालों की सफाई और जल निकासी दुरुस्त करने के नाम पर जो करोड़ों रुपये का बजट पास किया गया था, वह जमीनी स्तर पर काम के बजाय कागजी लीपापोती की भेंट चढ़ गया। नतीजा यह है कि राजधानी में हल्की सी बारिश होते ही दलदल सिवनी, चंगोराभाठा, मोवा और सड्डू जैसी घनी व निचली बस्तियों में घुटनों तक ड्रेनेज और गटर का गंदा पानी भर गया है। लोगों के घरों और किराना दुकानों में पानी घुसने से लाखों का नुकसान हो रहा है। इनसाइड खबर यह है कि निगम के मैदानी स्वास्थ्य अधिकारियों और ठेकेदारों की साठगांठ के कारण केवल मुख्य सड़कों के सामने सफाई का दिखावा किया गया, जबकि अंदरूनी गरीब बस्तियों के मुख्य ड्रेनेज सिस्टम को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया, जिससे अब संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।

