15 साल तक का बडे समय अंतराल बाद आरोपी को दोषी करार दिया गया
मूकनायक समाचार, सूरत
15 साल पूर्व सिल्क फैक्ट्री में पानी की नई लाईन जुडवाने के लिए अर्जी करने वाले फैक्ट्री संचालक को धाक-धमकी देकर रुपये 2500 की रिश्वत मामले में एसीबी के हाथों पकडे गए सूरत महानगरपालिका के आरोपी कर्मचारी को आज रिश्वत मामलों की खास अदालत के एडिशनल सेशन्स जज चंद्रकांत एन. देसाई ने लांच रिश्वत धारा की धारा-7 तथा 13(2) को जांच करके 13(1)(डी) के गुनाह में दोषी ठहराकर 3 साल की सख्त कैद और टोटल 10 हजार रुपये जुर्माना अगर जुर्माना नहीं भरा गया तो अधिक एक माह की कारावास की सजा सुनाई है।
रामपुरा में सिल्क फैक्ट्री के शिकायती संचालक ने जुन-2011 में फैक्ट्री में गंदा पानी आने के कारण पुरानी पाईप को बदलकर नई पाईप लगाने के लिए सूरत म्युनिसिपल कोर्पोरेशन में आवेदन किया था। जो काम आवेदक ने 2 हजार रुपये चार्ज दिया था। जिससे कोर्पोरेशन द्वारा प्लम्बर के द्वारा नई पाईपलाईन जुडी गई थी। इसके बाद आरोपी कर्मचारी चंद्रेश नटवरलाला पानवाला ने शिकायती की फैक्ट्री का दौरा कर पानी का कनेक्शन लाईन बदलने का रुपये 2500 की लांच रिश्वत मांगी थी। किन्तु शिकायती ने जरूरी चार्ज दे दिया है ऐसा कहने पर आरोपी ने धाक-धमकी देकर रिश्वत की मांग करता रहता था। जिससे शिकायती ने एसीबी में शिकायत करने पर एसीबी ने आरोपी को रंगेहाथ पकड लिया था। इस मामले की कार्रवाई के दौरान आरोपी के बचाव पक्ष ने बताया कि रिश्वत की मांग साबित नहीं हुई। शिकायती ने खुद आरोपी ने रुपयों की मांग नहीं की होने की बात कहकर होस्टाईल घोषित हुआ है। जब कि सरकार पक्ष ने एपीपी निलेश गोळवाळा ने 6 साक्षी तथा दस्तावेजी सबूत पेश किए थे बचाव पक्ष प्रिवेन्शन ओफ करप्शन एक्ट की धारा-20 के तहत किए गए अनुमान का खंडन करने में निष्फल रहा।

