
रायपुर, 5 जुलाई। छत्तीसगढ़ की विश्वविख्यात पंडवानी गायिका एवं पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. तीजन बाई का रविवार तड़के रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में उपचार के दौरान निधन हो गया। उनके निधन से छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश के कला एवं संस्कृति जगत में शोक की लहर है। वे पिछले कई दिनों से एम्स में भर्ती थीं।
डॉ. तीजन बाई का जन्म दुर्ग जिले के गनियारी गांव में हुआ था। बचपन में उन्होंने अपने नाना बृजलाल पारधी से महाभारत की कथाएं और पंडवानी गायन की प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। उस समय पंडवानी गायन मुख्यतः पुरुषों द्वारा प्रस्तुत किया जाता था, लेकिन उन्होंने सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती देते हुए कापालिक शैली की प्रभावशाली प्रस्तुति से इस लोककला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
अपनी सशक्त आवाज, प्रभावपूर्ण अभिनय, भाव-भंगिमाओं और तंबूरा के माध्यम से महाभारत के पात्रों का सजीव चित्रण उनकी विशिष्ट पहचान बना। उन्होंने भारत सहित दुनिया के अनेक देशों में पंडवानी की प्रस्तुतियां देकर छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाई।
लोककला के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 1988 में पद्मश्री, वर्ष 2003 में पद्म भूषण तथा वर्ष 2019 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया। इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, संगीत नाटक अकादमी फैलोशिप (अकादमी रत्न) सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया गया।
डॉ. तीजन बाई का जीवन संघर्ष, साधना और लोककला के प्रति समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण रहा। उन्होंने पंडवानी की परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा अनेक शिष्यों को प्रशिक्षण देकर इस समृद्ध लोक विरासत के संरक्षण और संवर्धन में उल्लेखनीय योगदान दिया।
उनके निधन को भारतीय लोककला जगत के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों की हस्तियों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का अमर प्रतीक बताया। अपनी अद्वितीय कला, ओजस्वी गायन और लोकसंस्कृति के संरक्षण में दिए गए अतुलनीय योगदान के कारण डॉ. तीजन बाई सदैव जनमानस की स्मृतियों में अमर रहेंगी।

