Friday, July 17, 2026
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जेलों में बंदियों के पुनर्वास की दिशा में प्रभावी पहल, कौशल प्रशिक्षण से आत्मनिर्भरता की नई राह

सूरजपुर जिला जेल में 35 बंदियों को अगरबत्ती, साबुन एवं हैंडवॉश निर्माण का प्रशिक्षण, रिहाई के बाद स्वरोजगार से जोड़ने पर विशेष जोर

छत्तीसगढ़ में बंदियों के पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में कौशल विकास आधारित पहलें लगातार प्रभावी साबित हो रही हैं। इसी क्रम में सूरजपुर जिला जेल में सेंट्रल बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) द्वारा 13 दिवसीय कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें 35 बंदियों ने अगरबत्ती, साबुन एवं हैंडवॉश निर्माण का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।

2 जुलाई से 13 जुलाई तक आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य बंदियों में उद्यमिता की भावना विकसित करना तथा रिहाई के बाद उन्हें स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ना रहा। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को उत्पाद निर्माण की आधुनिक तकनीक, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग, विपणन, वित्तीय साक्षरता, बैंकिंग प्रक्रियाओं तथा विभिन्न शासकीय स्वरोजगार योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण के समापन अवसर पर सभी 35 प्रतिभागियों का लिखित एवं प्रायोगिक मूल्यांकन किया गया। सफल प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई।

जिला जेल अधीक्षक ने कहा कि इस प्रकार के कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम बंदियों में आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और आत्मनिर्भर बनने की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे प्रयास उन्हें समाज में सम्मानपूर्वक पुनर्स्थापित होने का अवसर प्रदान करते हैं।

आरसेटी के निदेशक ने बताया कि संस्थान केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रहता, बल्कि बंदियों की रिहाई के बाद बैंक लिंकेज, ऋण सुविधा एवं दो वर्षों तक हैंडहोल्डिंग सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें स्वरोजगार स्थापित करने में भी सहयोग करता है। उन्होंने बताया कि अगरबत्ती एवं साबुन निर्माण जैसे लघु उद्योगों के माध्यम से प्रशिक्षित व्यक्ति प्रतिमाह लगभग 15 से 20 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर आत्मनिर्भर बन सकते हैं।

राज्य सरकार की पुनर्वास एवं कौशल विकास आधारित पहलें बंदियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही हैं। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल उन्हें रोजगारपरक कौशल प्रदान कर रहे हैं, बल्कि समाज की मुख्यधारा से सम्मानपूर्वक जुड़ने और आत्मनिर्भर नागरिक के रूप में नई शुरुआत करने का अवसर भी उपलब्ध करा रहे हैं।

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