
पीएम-जनमन योजना के तहत बनी 8.75 किमी सड़क से शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और आवागमन को मिली नई गति
रायपुर, 11 जुलाई। छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल के अतिदुर्गम अबूझमाड़ क्षेत्र में वर्षों से विकास की राह देख रहे ग्रामीणों के लिए डोंडरीबेड़ा से कटेर तक निर्मित नई सड़क उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है। प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) के तहत नारायणपुर जिले में निर्मित 8.75 किलोमीटर लंबी यह सड़क दशकों से मुख्यधारा से कटे जनजातीय गांवों को आवागमन की बेहतर सुविधा प्रदान करने के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बाजार तक आसान पहुंच सुनिश्चित कर रही है।

एक समय ऐसा था जब इस क्षेत्र के ग्रामीणों को संकरी और पथरीली पगडंडियों के सहारे आवाजाही करनी पड़ती थी। बरसात के मौसम में रास्ते पूरी तरह बंद हो जाते थे और गांवों का संपर्क बाहरी दुनिया से कट जाता था। विद्यार्थियों को स्कूल पहुंचने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था, जबकि गंभीर मरीजों और गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाने के कारण अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। कृषि उपज और वनोपज को बाजार तक पहुंचाना भी ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती थी, जिससे उन्हें उचित मूल्य नहीं मिल पाता था।
लगभग 856.19 लाख रुपये की लागत से निर्मित इस सड़क ने अब क्षेत्र की तस्वीर बदल दी है। सड़क बनने के बाद 108 एम्बुलेंस, शासकीय वाहन तथा प्रशासनिक अमला सीधे गांवों तक पहुंच रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ी है और आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध हो रहा है। वहीं विद्यार्थियों और शिक्षकों की विद्यालयों तक नियमित पहुंच सुनिश्चित होने से शिक्षा व्यवस्था को भी नई मजबूती मिली है।
नई सड़क के निर्माण से स्थानीय किसानों और वनोपज संग्राहकों को भी बड़ा लाभ मिला है। अब वे अपनी उपज को सीधे बड़े बाजारों तक आसानी से पहुंचा पा रहे हैं, जिससे उन्हें बेहतर मूल्य मिल रहा है और बिचौलियों पर निर्भरता कम हुई है। इससे ग्रामीणों की आय में वृद्धि के साथ आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिली है।
सड़क निर्माण का लाभ प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्य विकास कार्यों में भी दिखाई दे रहा है। अब सीमेंट, सरिया, रेत और अन्य निर्माण सामग्री गांवों तक आसानी से पहुंच रही है, जिससे पक्के मकानों का निर्माण तेज हुआ है। साथ ही बिजली और पेयजल जैसी आधारभूत सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन में भी तेजी आई है।
ग्रामीणों का कहना है कि पहले बाजार या जिला मुख्यालय तक पहुंचने में पूरा दिन लग जाता था, जबकि अब वाहन सीधे गांव तक पहुंच रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई, मरीजों के इलाज और दैनिक जरूरतों के लिए आवाजाही पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो गई है। ग्रामीणों ने इसे अपने जीवन में आए सबसे बड़े सकारात्मक बदलावों में से एक बताया है।
पीएम-जनमन योजना के तहत निर्मित डोंडरीबेड़ा-कटेर सड़क अबूझमाड़ जैसे दूरस्थ आदिवासी क्षेत्र में विकास की नई इबारत लिख रही है। यह परियोजना इस बात का उदाहरण है कि मजबूत सड़क संपर्क से शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार संभव होता है तथा दूरस्थ क्षेत्रों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है।

