Tuesday, September 29, 2026
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अबूझमाड़ के जंगलों में महकेगी कॉफी, बस्तर में कृषि क्रांति की तैयारी कॉफी बोर्ड ने माना क्षेत्र को उपयुक्त, अधिकारी कोरापुट में लेंगे प्रशिक्षण

रायपुर। छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ क्षेत्र में आजीविका संवर्धन, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से कॉफी की व्यावसायिक खेती शुरू करने की तैयारी तेज हो गई है। इस दिशा में जिला प्रशासन ने भारत सरकार के कॉफी बोर्ड के विशेषज्ञों के साथ नारायणपुर जिले के कुतुल, कच्चापाल, कोडलियार, ईरकभट्टी, तोके सहित आसपास के सुदूर वन क्षेत्रों का विस्तृत निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने क्षेत्र की जलवायु, वर्षा, तापमान, मिट्टी की गुणवत्ता तथा समुद्र तल से ऊंचाई का वैज्ञानिक अध्ययन किया। कॉफी बोर्ड की टीम ने पाया कि अबूझमाड़ का प्राकृतिक वातावरण कॉफी उत्पादन के लिए अनुकूल है। विशेषज्ञों का मानना है कि यहां कॉफी आधारित कृषि-वानिकी मॉडल विकसित कर स्थानीय ग्रामीणों को बड़े पैमाने पर रोजगार और स्थायी आय से जोड़ा जा सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार कॉफी के पौधों से लगभग चार वर्षों बाद व्यावसायिक उत्पादन शुरू होता है, जिसके बाद यह लंबे समय तक आय का स्रोत बन सकता है। परियोजना में स्थानीय स्व-सहायता समूहों और ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि प्रत्येक परिवार को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर मिल सकें। प्रारंभिक चरण में उपयुक्त भूमि का चयन, पौधरोपण तथा स्थानीय स्तर पर नर्सरी विकसित करने की तैयारी की जा रही है।

कॉफी उत्पादन की तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए कलेक्टर ने जिले के कृषि अधिकारियों एवं कर्मचारियों को ओडिशा के कोरापुट में प्रशिक्षण के लिए भेजने के निर्देश दिए हैं। वहां अधिकारी कॉफी उत्पादन, पौध प्रबंधन और आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण लेकर लौटेंगे तथा स्थानीय किसानों को मार्गदर्शन देंगे।

निरीक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि अबूझमाड़ का प्राकृतिक वातावरण भविष्य में चाय की खेती के लिए भी उपयुक्त हो सकता है। इसे देखते हुए कलेक्टर ने चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

निरीक्षण दल में भारत सरकार के कॉफी बोर्ड के अधिकारी, क्षेत्रीय कॉफी अनुसंधान केंद्र के विशेषज्ञ, वरिष्ठ संपर्क अधिकारी, जिला कृषि विभाग तथा जल संसाधन विभाग के अधिकारी भी शामिल रहे।

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