Tuesday, September 29, 2026
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छत्तीसगढ़ में हीरा खनन की दिशा में ऐतिहासिक कदम, बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में बड़े व्यास की ड्रिलिंग को मंजूरी

रायपुर। छत्तीसगढ़ की धरती अब लौह अयस्क के साथ-साथ हीरा उत्पादन के क्षेत्र में भी नई पहचान बनाने की ओर तेजी से बढ़ रही है। राज्य के महासमुंद जिले स्थित बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में व्यावसायिक हीरा खनन का मार्ग प्रशस्त करने की दिशा में बड़ा फैसला लिया गया है। नई दिल्ली में आयोजित एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड (एनसीएल) के निदेशक मंडल की बैठक में परियोजना के अगले महत्वपूर्ण चरण के तहत लार्ज डायमीटर (Large Diameter) ड्रिलिंग को मंजूरी दे दी गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह परियोजना का सबसे अहम वैज्ञानिक चरण है, जिसके माध्यम से किम्बरलाइट पाइप में मौजूद हीरा भंडार का सटीक आकलन किया जाएगा। ड्रिलिंग के बाद तैयार होने वाली विस्तृत व्यवहार्यता रिपोर्ट (फिजिबिलिटी रिपोर्ट) के आधार पर व्यावसायिक हीरा खदान विकसित करने का अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

बैठक में निदेशक मंडल ने परियोजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि प्रॉस्पेक्टिंग लाइसेंस की अवधि के भीतर सभी तकनीकी कार्य निर्धारित समय सीमा में पूरे किए जाएं, ताकि परियोजना को शीघ्र उत्पादन चरण तक पहुंचाया जा सके।

वैज्ञानिक परीक्षण में मिल चुके हैं प्राकृतिक हीरे

एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड भारत सरकार के उपक्रम एनएमडीसी लिमिटेड (51 प्रतिशत) तथा छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (49 प्रतिशत) का संयुक्त उपक्रम है। अब तक कंपनी मुख्य रूप से लौह अयस्क परियोजनाओं पर कार्य करती रही है, लेकिन बलौदा-बेलमुंडी क्षेत्र में प्राकृतिक हीरों की पुष्टि के बाद कंपनी बहु-खनिज विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।

परियोजना के तहत स्ट्रीम सेडिमेंट सैंपलिंग, भू-भौतिकीय सर्वेक्षण और लक्षित ड्रिलिंग के माध्यम से किम्बरलाइट पाइप की पहचान की गई। इसके बाद लगभग 200 टन बल्क सैंपल का परीक्षण एनएमडीसी के पन्ना डायमंड प्रोसेसिंग प्लांट में किया गया, जहां 1.22 कैरेट वजन के पांच प्राकृतिक हीरे प्राप्त हुए। इस सफलता ने क्षेत्र में हीरा युक्त भू-संरचना की वैज्ञानिक पुष्टि कर दी है।

देश के प्रमुख हीरा उत्पादक राज्यों में शामिल हो सकता है छत्तीसगढ़

खनन विशेषज्ञों का मानना है कि बोत्सवाना, दक्षिण अफ्रीका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी प्रारंभिक चरण में इसी प्रकार के संकेत मिलने के बाद बड़े व्यावसायिक हीरा भंडार विकसित हुए थे। ऐसे में बलौदा-बेलमुंडी परियोजना से भविष्य में बड़े पैमाने पर हीरा उत्पादन की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। यदि आगामी परीक्षण सफल रहते हैं तो छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख हीरा उत्पादक राज्यों में अपनी नई पहचान स्थापित कर सकता है।

लौह अयस्क परियोजनाओं की भी हुई समीक्षा

बैठक में राज्य की प्रमुख लौह अयस्क परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। बैलाडीला डिपॉजिट-4 में चालू वित्तीय वर्ष के दौरान 10 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसे चरणबद्ध तरीके से बढ़ाकर 70 लाख टन प्रतिवर्ष करने की योजना है। वहीं बैलाडीला डिपॉजिट-13 को एक करोड़ टन वार्षिक उत्पादन क्षमता के साथ विकसित करने की दिशा में भी कार्य जारी है।

पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय विकास को मिलेगी प्राथमिकता

निदेशक मंडल ने स्पष्ट किया कि सभी खनन परियोजनाओं में वैज्ञानिक एवं पर्यावरण अनुकूल खनन पद्धति अपनाई जाएगी। जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण तथा स्थानीय समुदायों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को परियोजना का अभिन्न हिस्सा बनाया जाएगा।

बैठक में यह भी दोहराया गया कि खनिज संसाधनों का संतुलित एवं विवेकपूर्ण उपयोग राज्य और देश की आर्थिक प्रगति के लिए आवश्यक है। बलौदा-बेलमुंडी हीरा परियोजना न केवल छत्तीसगढ़ की खनिज क्षमता को नई पहचान देगी, बल्कि रोजगार, औद्योगिक निवेश और क्षेत्रीय विकास के नए अवसर भी सृजित करेगी। यदि आगामी चरण सफल रहते हैं तो यह परियोजना छत्तीसगढ़ के खनन इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है।

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