

मूकनायक समाचार | सत्यशील गोंडाने | बालाघाट
बालाघाट/बैहर। सोशल मीडिया के दौर में बनने वाले रिश्ते कई बार ऐसे मोड़ पर पहुंच जाते हैं, जहां भावनाओं और कानून के बीच टकराव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। ऐसा ही एक मामला विकासखंड बैहर की ग्राम पंचायत नव्ही में सामने आया, जहां इंस्टाग्राम पर शुरू हुई दोस्ती प्रेम संबंध में बदल गई और विवाह तक पहुंचने वाली थी। लेकिन महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस विभाग तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की संयुक्त टीम की तत्परता और संवेदनशील हस्तक्षेप से एक नाबालिग बालिका का बाल विवाह समय रहते रोक दिया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत नव्ही में एक नाबालिग बालिका के विवाह की सूचना प्रशासन को प्राप्त हुई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग दीपमाला मंगोदिया के निर्देशन में तत्काल संयुक्त टीम गठित कर मौके पर भेजी गई। टीम में महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रीति हरिनखेड़े, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पैरालीगल वॉलेंटियर मानिकराम टेकाम, पुलिस विभाग से सतीश टेकाम एवं नसीब धुर्वे तथा ग्राम पंचायत नव्ही के सरपंच मुकेश मरावी शामिल रहे।
मौके पर पहुंची टीम ने बालक एवं बालिका के शैक्षणिक अभिलेखों सहित अन्य दस्तावेजों का सत्यापन किया। जांच में बालिका की आयु 17 वर्ष 5 माह तथा बालक की आयु 22 वर्ष 7 माह पाई गई। बालिका की आयु विवाह के लिए निर्धारित वैधानिक आयु से कम होने के कारण प्रस्तावित विवाह बाल विवाह की श्रेणी में पाया गया।
जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि युवक और युवती की पहचान लगभग एक वर्ष पूर्व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के माध्यम से हुई थी। समय के साथ दोनों के बीच मित्रता गहरी हुई और यह संबंध प्रेम में परिवर्तित हो गया। दोनों ने विवाह करने का निर्णय लिया था। बताया गया कि बालिका बिना परिजनों को सूचना दिए युवक के घर पहुंच गई थी, जिसके बाद मामला प्रशासन के संज्ञान में आया।
संयुक्त टीम ने दोनों पक्षों के परिजनों को बुलाकर विस्तृत चर्चा की और बाल विवाह के कानूनी, सामाजिक तथा स्वास्थ्य संबंधी दुष्परिणामों की जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत बाल विवाह कराना, उसमें सहयोग करना अथवा उसे प्रोत्साहित करना दंडनीय अपराध है। साथ ही कम उम्र में विवाह से शिक्षा, स्वास्थ्य एवं भविष्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों के बारे में भी समझाया गया।
अधिकारियों की समझाइश और कानूनी परामर्श का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला। बालिका ने अपने परिजनों के साथ घर लौटने की सहमति दी तथा आश्वासन दिया कि वह वैधानिक आयु पूर्ण होने के बाद ही विवाह संबंधी कोई निर्णय लेगी।
महिला एवं बाल विकास विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं भी बाल विवाह की तैयारी अथवा आयोजन की जानकारी मिले तो तत्काल संबंधित विभाग, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 या महिला हेल्पलाइन 181 पर सूचना दें। समय पर दी गई सूचना किसी बच्चे के भविष्य को सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
संयुक्त टीम की सतर्कता और समय पर की गई कार्रवाई से न केवल एक बाल विवाह रुक सका, बल्कि एक किशोरी के शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य की दिशा भी सुनिश्चित हुई है। यह घटना समाज में बाल अधिकारों के संरक्षण और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन का एक सकारात्मक उदाहरण बनकर सामने आई है।

