

अनुविभागीय कृषि अधिकारी ने किया निरीक्षण, किसानों को समन्वित कृषि अपनाने की दी सलाह
मूकनायक समाचार/सत्यशील गोंडाने
बालाघाट
बालाघाट। विकासखंड लांजी के ग्राम पालडोंगरी निवासी प्रगतिशील कृषक लखनलाल उमरे का बहुआयामी कृषि मॉडल क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनता जा रहा है। खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से अपनाई गई उनकी समन्वित कृषि प्रणाली को कृषि विभाग ने भी सराहा है।
इसी क्रम में शुक्रवार को अनुविभागीय अधिकारी कृषि लांजी खुदीराम सनोडिया एवं क्षेत्रीय कृषि विस्तार अधिकारी इंदु उइके ने कृषक लखनलाल उमरे के कृषि फार्म का निरीक्षण कर वहां संचालित विभिन्न कृषि गतिविधियों का अवलोकन किया।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि कृषक पारंपरिक खेती के साथ-साथ मत्स्य पालन, पशुपालन एवं बागवानी जैसी आयवर्धक गतिविधियों का सफल संचालन कर रहे हैं। खेत में विभिन्न फसलों के उत्पादन के साथ आम की उन्नत एवं व्यावसायिक किस्मों का रोपण भी किया गया है, जिससे कृषि को बहुआयामी स्वरूप मिला है और आय के विविध स्रोत विकसित हुए हैं।
अधिकारियों ने मत्स्य पालन इकाई का निरीक्षण कर उत्पादन क्षमता एवं आय की संभावनाओं की जानकारी प्राप्त की। वहीं आम के पौधों की विभिन्न प्रजातियों, उनके रखरखाव और भविष्य में मिलने वाले आर्थिक लाभों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। पशुपालन इकाई का निरीक्षण करते हुए अधिकारियों ने बताया कि खेती के साथ पशुपालन को जोड़ने से किसानों को अतिरिक्त आय प्राप्त होने के साथ जैविक खेती को भी बढ़ावा मिलता है।
अनुविभागीय अधिकारी कृषि खुदीराम सनोडिया ने कहा कि वर्तमान समय में केवल एक फसल पर निर्भर रहना किसानों के लिए पर्याप्त नहीं है। यदि किसान कृषि के साथ मत्स्य पालन, बागवानी और पशुपालन जैसी गतिविधियों को अपनाते हैं तो उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। उन्होंने कहा कि लखनलाल उमरे का मॉडल इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि सीमित संसाधनों में भी समन्वित कृषि प्रणाली अपनाकर बेहतर आर्थिक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
क्षेत्रीय कृषि विस्तार अधिकारी इंदु उइके ने कृषक को विभागीय योजनाओं, आधुनिक कृषि तकनीकों तथा प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने किसानों से कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ उठाकर आधुनिक एवं बहुआयामी कृषि पद्धतियों को अपनाने का आह्वान किया।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के बहुआयामी कृषि मॉडल न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। लखनलाल उमरे का यह प्रयास क्षेत्र के किसानों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभर रहा है।

