Thursday, June 11, 2026
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बाल विवाह पर सख्त हुई सरकार : सूरजपुर में दो मामलों में पॉक्सो एक्ट के तहत होगी कार्रवाई

नाबालिग बालिकाओं को सुरक्षित संरक्षण में लिया गया, प्रशासन की संयुक्त टीम ने की त्वरित कार्रवाई

रायपुर, 15 मई 2026। छत्तीसगढ़ सरकार ने बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ अपना रुख और अधिक सख्त कर दिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप राज्य में चलाए जा रहे बाल विवाह उन्मूलन अभियान के तहत सूरजपुर जिले में सामने आए दो गंभीर मामलों में प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पॉक्सो एक्ट एवं बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत अपराध दर्ज करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है।

कलेक्टर रेना जमील के निर्देश पर महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड लाइन तथा पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने दोनों मामलों में सक्रिय हस्तक्षेप कर नाबालिग बालिकाओं को सुरक्षित संरक्षण में लिया। प्रशासन की इस कार्रवाई को बाल विवाह के विरुद्ध राज्य सरकार की गंभीरता के रूप में देखा जा रहा है।

जानकारी के अनुसार पहला मामला भटगांव क्षेत्र के एक गांव का है, जहां 14 वर्षीय बालिका के विवाह की सूचना मिलने पर संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। जांच में सामने आया कि बालिका का विवाह दिसंबर 2025 में मंदिर में कराया गया था। उस समय उसकी आयु मात्र 13 वर्ष 8 माह थी। विवाह के बाद से बालिका को लड़के के घर में पत्नी के रूप में रखा गया था। प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बालिका को रेस्क्यू कर सखी वन स्टॉप सेंटर में सुरक्षित संरक्षण प्रदान किया तथा बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत करने की प्रक्रिया प्रारंभ की।

दूसरा मामला प्रेमनगर क्षेत्र के एक दूरस्थ गांव का है, जहां टोल फ्री नंबर 1098 पर सूचना प्राप्त हुई कि एक नाबालिग बालिका का विवाह कराया जा रहा है। प्रशासनिक टीम के पहुंचने से पहले ही परिजनों ने कार्रवाई के भय से सुबह-सुबह विवाह संपन्न करा दिया और बालिका को ससुराल भेज दिया। इसके बाद संयुक्त टीम ने वर पक्ष के गांव पहुंचकर जांच की। प्रारंभिक पूछताछ में परिजनों ने विवाह से इनकार किया, लेकिन बाद में विवाह संपन्न होने की बात स्वीकार कर ली। प्रशासन ने बालिका को सुरक्षित संरक्षण में लेकर सखी वन स्टॉप सेंटर भेज दिया।

जिला कार्यक्रम अधिकारी शुभम बंसल के निर्देशन में जिला बाल संरक्षण अधिकारी मनोज जायसवाल एवं संयुक्त टीम ने दोनों मामलों का विस्तृत प्रतिवेदन तैयार कर संबंधित अधिकारियों को अपराध पंजीबद्ध करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बाल विवाह कराने वाले अभिभावकों, सहयोग करने वालों तथा संबंधित पक्षों के विरुद्ध कानून के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।

राज्य सरकार का मानना है कि बाल विवाह बच्चों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। इससे बालिकाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसी उद्देश्य से राज्यभर में गांव-गांव जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। स्कूलों में संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं तथा समुदाय आधारित निगरानी तंत्र को मजबूत किया जा रहा है, ताकि छत्तीसगढ़ को बाल विवाह मुक्त राज्य बनाया जा सके।

महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बाल विवाह जैसे मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के विरुद्ध तत्काल कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

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