मूकनायक/रिपोर्टर, राजेश कुमार/बस्ती/उत्तर प्रदेश
नाबालिग के अपहरण, शोषण और धमकी के मामले में आरोपी पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज
बस्ती। थाना रुधौली से पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक पिता अपनी 15 वर्षीय नाबालिग पुत्री के साथ हुए कथित अन्याय के लिए 25 अप्रैल 2026 से न्याय की गुहार लगा रहा था, लेकिन पुलिस ने कई दिनों तक मामले में कोई कार्रवाई नहीं की।
हालांकि, सोशल मीडिया और पत्रकारों द्वारा मामले को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया। घटना के छह दिन बाद, 1 मई 2026 को थाना रुधौली में मुकदमा दर्ज किया गया।
पीड़ित पिता द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, उनकी 15 वर्षीय पुत्री को आरोपी अब्दुल हक लंबे समय से फोटो और वीडियो के माध्यम से ब्लैकमेल कर रहा था। आरोप है कि उसने किशोरी का शारीरिक एवं मानसिक शोषण किया तथा उसे जान से मारने की धमकी भी दी।
शिकायत के मुताबिक, 24 अप्रैल 2026 को आरोपी ने नाबालिग का अपहरण कर लिया। दो दिन बाद जब पीड़िता घर लौटी और उसने परिजनों को पूरी घटना बताई, तो परिवार ने इसका विरोध किया। आरोप है कि विरोध करने पर आरोपी ने पीड़ित परिवार को जातिसूचक गालियां दीं और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि घटना के अगले दिन, 25 अप्रैल को ही थाना रुधौली में लिखित तहरीर दे दी गई थी। इसके बावजूद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करने में अत्यधिक विलंब किया। मामला जब पत्रकारों और सोशल मीडिया पर उठा, तब जाकर 1 मई 2026 को शाम 3:31 बजे थाना रुधौली में एफआईआर संख्या 0109/2026 दर्ज की गई।
पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS), पॉक्सो एक्ट तथा एससी/एसटी एक्ट की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। एफआईआर में बीएनएस की धारा 137(2), 65(1), 352 और 351(3) शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (POCSO Act), 2012 की धारा 3 और 4 के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। वहीं, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(2)(v), 3(1)(द), 3(1)(ध) और 3(2)(va) भी लगाई गई हैं।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पीड़िता को आवश्यक कानूनी और चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। जांच के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
पीड़ित का कहना है कि यदि पत्रकारों ने इस मुद्दे को नहीं उठाया होता तो शायद वह आज भी थाने के चक्कर ही काट रहा होता। अब देखना यह है कि पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी कितनी जल्दी करती है।

