Thursday, June 11, 2026
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आत्मा कार्यालय बालाघाट में कृषि सखियों का प्रशिक्षण आयोजित डीएसआर एवं प्राकृतिक खेती पर दिया गया विशेष जोर

मूकनायक समाचार
सत्यशील गोंडाने, बालाघाट

कृषि विभाग द्वारा किसानों तक आधुनिक, टिकाऊ एवं पर्यावरण हितैषी कृषि तकनीकों की जानकारी पहुंचाने के उद्देश्य से आत्मा कार्यालय बालाघाट में विकासखंड परसवाड़ा एवं खैरलांजी की कृषि सखियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कृषि सखियों ने भाग लेकर उन्नत कृषि तकनीकों, डीएसआर पद्धति एवं प्राकृतिक खेती संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में परियोजना संचालक फूलसिंह मालवीय ने कृषि सखियों को डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) तकनीक की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यह धान उत्पादन की आधुनिक एवं प्रभावी पद्धति है, जिसमें सीधे बुवाई की जाती है। इस तकनीक से पानी, श्रम एवं उत्पादन लागत में कमी आती है तथा किसानों को बेहतर लाभ प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के वर्तमान दौर में डीएसआर तकनीक किसानों के लिए उपयोगी विकल्प बनकर उभर रही है।

उन्होंने बताया कि पारंपरिक रोपाई पद्धति की तुलना में डीएसआर तकनीक पर्यावरण के लिए अधिक अनुकूल है तथा इससे मीथेन गैस के उत्सर्जन में कमी आती है। कृषि सखियों से किसानों को इस तकनीक के लाभों के प्रति जागरूक करने का आह्वान किया गया।

प्रशिक्षण के दौरान प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है। ऐसे में प्राकृतिक एवं जैविक खेती अपनाकर कम लागत में गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

कार्यक्रम में धान की फसल में अजोला के उपयोग एवं उसके लाभों की जानकारी भी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि अजोला एक प्रभावी जैविक उर्वरक है, जो मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने, नमी संरक्षण तथा उत्पादन क्षमता में वृद्धि करने में सहायक होता है। इसके अलावा हरी खाद फसल ढैंचा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि इसके उपयोग से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, जिससे भूमि की गुणवत्ता में सुधार होता है।

प्रशिक्षण के दौरान कृषि सखियों ने कृषि विशेषज्ञों से विभिन्न विषयों पर चर्चा कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। अधिकारियों ने कृषि सखियों से गांव-गांव पहुंचकर किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, प्राकृतिक खेती एवं जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने की अपील की।

कार्यक्रम उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।

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