“सम्यक बौद्ध विहार तालापारा में डॉ. आंबेडकर जयंती धूमधाम से मनाई गई, सैकड़ों लोगों की गरिमामयी उपस्थिति
मूकनायक
दिलीप मैश्राम”
बिलासपुर।
सम्यक बौद्ध विहार, तालापारा में दिनांक 17 अप्रैल 2026 की संध्या 7 बजे डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर जयंती अत्यंत हर्षोल्लास, गरिमा एवं भव्यता के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में समाज के सभी वर्गों की सक्रिय सहभागिता देखने को मिली, जिसमें अतिथियों के प्रेरक उद्बोधन, कविता पाठ तथा बच्चों द्वारा बुद्ध एवं धम्म गीतों पर रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समा बांध दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रमुख अतिथियों सारंग राव हुमने, राजेश हुमने, बसंत ओण्डकार, कमलेश लाहोत्रे, संतोष खोब्रागड़े, मनोरंजन मेश्राम, कमल धमगाये एवं रेखा बंसोड़ द्वारा तथागत गौतम बुद्ध के चरणों में पुष्प अर्पण, दीप प्रज्वलन एवं सामूहिक बुद्ध वंदना के साथ किया गया।
मुख्य अतिथि सारंग राव हुमने (अध्यक्ष, बौद्ध समाज बिलासपुर) ने अपने उद्बोधन में डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर के संघर्ष, मूल्यों और दूरदर्शी नेतृत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम उनके बताए मार्ग पर चलें तथा सामाजिक न्याय और नैतिकता पर आधारित जीवन अपनाएं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए भारतीय बौद्ध महासभा जिला शाखा के अध्यक्ष राजेश हुमने ने डॉ. आंबेडकर के जीवन संघर्षों का उल्लेख करते हुए बताया कि किस प्रकार उन्हें बचपन से ही सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान के निर्माता के रूप में डॉ. आंबेडकर का योगदान अतुलनीय है। उन्होंने हिन्दू कोड बिल के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह महिलाओं को समान अधिकार दिलाने का एक क्रांतिकारी प्रयास था, जिसे पारित न होने पर उन्होंने 1951 में कानून मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।
अन्य विशिष्ट अतिथियों बसंत ओण्डकार, कमलेश लाहोत्रे, देवेंद्र मोटघरे एवं कुणाल रामटेके ने भी अपने विचार व्यक्त किए। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में आरूसी चौरे, लावन्या सहारे, आरची सहारे, आरजू सहारे, धनसिका गजभिये सहित अन्य बच्चों ने मनमोहक प्रस्तुतियां दीं।
कविता पाठ के माध्यम से डॉ. आंबेडकर युवा मंच के अध्यक्ष नितेश अंबादे ने प्रभावी ढंग से अपने विचार रखते हुए आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का सफल संचालन मनोरंजन मेश्राम द्वारा किया गया।
इस अवसर पर बौद्ध समाज के सैकड़ों उपासक-उपासिकाओं की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिनमें धनवन्ता जामुलकर, जय शीला जामुलकर, शीला नंदेश्वर, ज्योति सहारे, कल्पना टेम्मूरकर, नीलू जामुलकर, रंजना चौरे, कमल धमगाये, वंदना रामटेके, भावना मेश्राम, लक्ष्मी बंसोड़, संगीता चौरे, चुलबुल बंसोड़, जयंत चौरे, बिंदु धमगाये, राजेश धमगाये, खोकचंद जामुलकर, कमलेश सहारे, शौर्य सहारे, रत्नमाला कोटांगले, पार्वती साखरे, प्रेरणा उके, रीतू वाहने, अनिता उके, संध्या सहारे, प्रियंका साखरे, सीमा साखरे, जया बंसोड़, कान्ता बंसोड़, लक्ष्मी बडोले, सुनिता बडोले, सरस्वती खोब्रागड़े, शांता बाई नंदेश्वर, दमयंता जामुलकर, अंजना जामुलकर, रसीला नंदेश्वर, नीलू नंदेश्वर, अंजना बोरकर, वर्षा मेश्राम, दुर्गेश उके, सुजाता खोब्रागड़े, सावित्री मेश्राम, उजाला चंद्रिकापुरे, सत्यभामा नंदा गौरी, हेमा रामटेके, गीता उके, सीमा मेश्राम, जयश्री उके, बेबो उके, नीता हुमने, कविता मेश्राम, स्वाती मेश्राम, अनिता चौहान, शैली भीमटे, शिल्पी भीमटे, सुजाता भीमटे, दीपिका बोरकर, सुनिता मेश्राम, शम्मी मेश्राम, आरती तेमुरकर, रश्मि खोब्रागड़े, लोकेश खोब्रागड़े, वर्षा रामटेके, नारायण राव हुमने, सुखनंदन मेश्राम, शैलेश गजभिए, शैलेश चंद्रिकापुरे, राजेश रामटेके, संजय हुमने, अधीर उके, मिलिंद खोब्रागड़े एवं रत्नेश उके प्रमुख रूप से शामिल रहे।
कार्यक्रम में उपस्थित जनसमुदाय ने डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर के आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।


