


मूकनायक समाचार / सत्यशील गोडाने
बालाघाट
वारासिवनी तहसील अंतर्गत रामपायली के वार्ड क्रमांक 06 में डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर की 135वीं जयंती भव्यता, उत्साह और गरिमामय वातावरण में मनाई गई। दो दिवसीय यह सार्वजनिक जयंती समारोह 13 एवं 14 अप्रैल 2026 को विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक एवं प्रेरणादायी कार्यक्रमों के साथ सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम का आयोजन डॉ. बाबा साहब अंबेडकर सार्वजनिक जयंती समारोह समिति एवं सम्राट अशोक बुद्ध विहार समिति, रामपायली के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। आयोजन स्थल पर शुरू से ही उत्सव जैसा माहौल बना रहा, जहां क्षेत्र सहित आसपास के ग्रामीण एवं शहरी इलाकों से हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समा
13 अप्रैल को कार्यक्रम का शुभारंभ बुद्ध वंदना एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद बच्चों एवं युवाओं द्वारा गीत, नृत्य, नाटक और भाषणों की प्रभावशाली प्रस्तुतियां दी गईं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से बाबा साहब के जीवन संघर्ष, सामाजिक समानता, शिक्षा के महत्व एवं संविधान निर्माण में उनके योगदान को दर्शाया गया। बाल कलाकारों द्वारा प्रस्तुत भीम गीतों ने उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया।
मुख्य जयंती पर उमड़ी श्रद्धा की लहर
14 अप्रैल को मुख्य समारोह आयोजित हुआ, जिसमें सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। बाबा साहब की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। “जय भीम” के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने अपने संबोधन में बाबा साहब के विचारों को वर्तमान समाज के लिए अत्यंत प्रासंगिक बताते हुए शिक्षा, संगठन और संघर्ष के संदेश को अपनाने का आह्वान किया।
सभी वर्गों की रही सक्रिय भागीदारी
आयोजन में महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों एवं बच्चों सहित समाज के सभी वर्गों की उल्लेखनीय सहभागिता रही। महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया और बाबा साहब के विचारों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
पूरे कार्यक्रम के दौरान अनुशासन, एकता और भाईचारे का उत्कृष्ट उदाहरण देखने को मिला। आयोजन स्थल को आकर्षक रूप से सजाया गया था, जिससे कार्यक्रम की भव्यता और बढ़ गई।
समिति ने जताया आभार
कार्यक्रम की सफलता पर समिति ने सभी सहयोगियों, दानदाताओं, कार्यकर्ताओं एवं क्षेत्रवासियों का आभार व्यक्त किया। पदाधिकारियों ने बताया कि सभी के सहयोग से यह आयोजन सफल हो सका और भविष्य में भी इसी तरह सहयोग की अपेक्षा की गई।
सामाजिक चेतना का बना केंद्र
यह जयंती समारोह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता, शिक्षा और समानता का संदेश देने वाला सशक्त माध्यम बनकर उभरा। अंत में उपस्थित जनसमूह ने एक स्वर में संकल्प लिया कि वे बाबा साहब के बताए मार्ग पर चलकर समतामूलक, शिक्षित और संगठित समाज के निर्माण में अपना योगदान देंगे।

