
मूकनायक समाचार / छत्तीसगढ़
बिलासपुर। जिले में निजी विद्यालयों की मनमानी, अत्यधिक फीस वसूली, महंगी निजी प्रकाशकों की किताबों की अनिवार्यता तथा शिक्षा विभागीय नियमों की खुली अवहेलना को लेकर एनएसयूआई ने एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है। एनएसयूआई के प्रदेश सचिव रंजेश सिंह के नेतृत्व में निजी स्कूलों में व्याप्त अनियमितताओं के खिलाफ की गई शिकायतों के बाद जिला शिक्षा विभाग ने जांच प्रक्रिया तो शुरू की, लेकिन जांच के बाद भी जमीनी स्तर पर सुधार नहीं होना गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
रंजेश सिंह ने आरोप लगाया कि जिले के कई निजी विद्यालय शासन और शिक्षा विभाग के स्पष्ट निर्देशों को दरकिनार कर अभिभावकों पर आर्थिक बोझ डाल रहे हैं। अभिभावकों को बच्चों के लिए अत्यधिक शुल्क जमा करने के साथ-साथ केवल निर्धारित दुकानों से महंगी निजी प्रकाशकों की पुस्तकें खरीदने के लिए बाध्य किया जा रहा है। जबकि शासन स्तर पर एनसीईआरटी एवं निःशुल्क निगम पाठ्यपुस्तकों को प्राथमिकता देने के निर्देश हैं।
उन्होंने कहा कि अधिकांश विद्यालयों में मान्यता संबंधी जानकारी, फीस संरचना, फीस निर्धारण समिति का विवरण और अन्य आवश्यक सूचनाएं सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित नहीं की जा रही हैं। यह स्थिति शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी और नियमों की खुली अवहेलना को दर्शाती है।
केंद्रीयकृत परीक्षा व्यवस्था को लेकर भी कई बड़े विद्यालयों की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। शिकायतों के बाद ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल ने छात्रों को केंद्रीयकृत परीक्षा में सम्मिलित कराया, लेकिन कई अन्य विद्यालय अब भी इससे दूरी बनाए हुए हैं, जिससे छात्रों और अभिभावकों के भविष्य को लेकर भ्रम और चिंता बनी हुई है।
जांच के नाम पर केवल औपचारिकता किए जाने का आरोप लगाते हुए रंजेश सिंह ने बताया कि KPS स्कूल समूह की विभिन्न शाखाओं में जांच प्रक्रिया पूरी कर ली गई, लेकिन वास्तविक सुधार कहीं दिखाई नहीं दे रहा। विद्यालयों में आज भी महंगी निजी पुस्तकों का संचालन जारी है और शासन के निर्देश प्रभावहीन साबित हो रहे हैं।

इसी तरह सेंट जेवियर्स स्कूल समूह में केवल एक शाखा की जांच कर मामले को सीमित कर दिया गया, जबकि अन्य शाखाओं में भी समान शिकायतें मौजूद हैं। वहीं आचीवर्स स्कूल में अब तक जांच प्रारंभ न होना प्रशासनिक निष्क्रियता और पक्षपातपूर्ण रवैये की ओर संकेत करता है।

रंजेश सिंह ने स्पष्ट कहा कि यदि जांच के बाद भी नियमों का पालन सुनिश्चित नहीं हो रहा है तो यह कार्रवाई केवल दिखावा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विद्यालयों को संरक्षण दिया जा रहा है, जिससे छात्रों और अभिभावकों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
एनएसयूआई ने चेतावनी दी है कि यदि दो दिनों के भीतर सभी निजी विद्यालयों में निष्पक्ष जांच कर ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय का घेराव किया जाएगा। इस आंदोलन में 200 से अधिक कार्यकर्ताओं और अभिभावकों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
एनएसयूआई की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
KPS स्कूल समूह की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए
सेंट जेवियर्स स्कूल समूह की सभी शाखाओं में निष्पक्ष जांच हो
आचीवर्स स्कूल में तत्काल जांच शुरू कर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए
निजी प्रकाशकों की पुस्तकों पर रोक लगाकर एनसीईआरटी एवं निःशुल्क निगम पाठ्यपुस्तकों का उपयोग सुनिश्चित किया जाए
फीस निर्धारण समिति की सूची और निर्णय सार्वजनिक किए जाएं
सभी विद्यालयों में मान्यता एवं शुल्क संबंधी जानकारी अनिवार्य रूप से प्रदर्शित की जाए
एनएसयूआई ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त किसी भी प्रकार की अनियमितता को स्वीकार नहीं किया जाएगा और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए संगठन हर स्तर पर संघर्ष जारी रखेगा.

