मूकनायक न्यूज/सिरोही/राजस्थान।
सिरोही। भारत मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष वामन मेश्राम तथा राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी विकास पटेल के संयुक्त आह्वान पर 23 अप्रैल 2026 को भारत बंद का ऐलान किया गया है।
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट दशरथ सिंह आढ़ा ने बताया कि आजादी के बाद तथाकथित मुख्यधारा की दोनों प्रमुख पार्टियों ने ओबीसी समाज के साथ लगातार धोखा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों पार्टियां आपसी समझौते से पिछड़े वर्ग की जाति आधारित गिनती नहीं करा रही हैं। इससे ओबीसी समाज को अपनी जनसंख्या के अनुपात में सरकारी नौकरियों, शिक्षा और राजनीति में उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल पा रहा है।
एडवोकेट आढ़ा ने कहा, “जब हिस्सेदारी ही नहीं मिलेगी तो यह लोकतंत्र प्रतिनिधित्व विहीन हो जाएगा, जो कुछ ही अल्पसंख्यक जातियों के नियंत्रण में चला जा रहा है। हम इस अन्याय के विरोध में 23 अप्रैल को पूरे देश में भारत बंद कर रहे हैं।”
बहुजन क्रांति मोर्चा के जिला संयोजक एडवोकेट सुंदर लाल मोसलपुरिया ने उच्च शिक्षा में बढ़ रही जातिगत प्रताड़ना का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि सरकार ने कमजोर यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन एक्ट लाकर सुप्रीम कोर्ट में कमजोर पैरवी की, जिससे यह अधर में लटक गया है। यूजीसी की खुद की रिपोर्ट के अनुसार उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रताड़ना की घटनाएं 118 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। रोहित वेमुला, पायल तडवी समेत हजारों छात्र-छात्राएं इस व्यवस्था की भेंट चढ़ चुके हैं।
एडवोकेट मोसलपुरिया ने मांग की कि केंद्र सरकार तुरंत मजबूत और सख्त यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन एक्ट बनाए तथा उसे कड़ाई से लागू करे, ताकि इन वर्गों के छात्रों को उच्च शिक्षण संस्थानों में सुरक्षा मिल सके।
भारत मुक्ति मोर्चा के जिलाध्यक्ष डॉ. आसुराम लूनिया ने 2011 से पहले नियुक्त सभी शिक्षकों पर टीईटी लागू करने के फैसले का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने कहा कि उस समय जो परीक्षा उन शिक्षकों के लिए निर्धारित थी, उन्होंने उसे सफलतापूर्वक पास किया और नियुक्ति प्राप्त की। अब अचानक उनके लिए टीईटी अनिवार्य करना हजारों शिक्षक परिवारों को बेरोजगारी और बेघर करने जैसा है। डॉ. लूनिया ने चेतावनी दी कि यह कदम शिक्षा व्यवस्था को भी प्रभावित करेगा, इसलिए हम इस बंद के माध्यम से इसका विरोध कर रहे हैं।
क्षत्रिय मूलनिवासी महासंघ के राष्ट्रीय सचिव राजेंद्र सिंह परमार ने सभी मुद्दों का समर्थन करते हुए कहा कि वर्तमान व्यवस्था में सरकार क्षत्रिय समाज के गौरवशाली इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है और उनके महापुरुषों का चरित्र हनन किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “यह हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। क्षत्रिय मूलनिवासी महासंघ इन सभी अन्यायपूर्ण नीतियों के खिलाफ खड़ा है।”
परमार ने घोषणा की कि सिरोही जिले सहित पूरे राजस्थान में भारत बंद को पूरी शक्ति से समर्थन दिया जाएगा। उन्होंने अपील की कि सभी वर्गों के लोग शांतिपूर्ण तरीके से इस बंद में शामिल होकर अपनी आवाज बुलंद करें।
संगठनों ने आम जनता, व्यापारियों, परिवहन कर्मियों और किसानों से अपील की है कि 23 अप्रैल 2026 को अनावश्यक आवागमन न करें और शांतिपूर्ण तरीके से भारत बंद को सफल बनाने में सहयोग दें। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह बंद लोकतंत्र को मजबूत करने और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए है, न कि किसी के खिलाफ व्यक्तिगत विरोध में।
यह आंदोलन भारत मुक्ति मोर्चा, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा, बहुजन क्रांति मोर्चा और क्षत्रिय मूलनिवासी महासंघ के संयुक्त प्रयासों का हिस्सा है, जो मूलनिवासी बहुजन समाज के अधिकारों की लड़ाई लड़ रहा है।

