

मूकनायक/ सत्यशील गोंडाने
बालाघाट
रामपायली/वारासिवनी (बालाघाट)। क्षेत्र के चंदन नदी तट पर स्थित श्री बालाजी गौशाला इन दिनों अव्यवस्थाओं और लापरवाही के कारण बदहाल स्थिति में पहुंच गई है। कभी गौ संरक्षण और सेवा के उद्देश्य से स्थापित इस गौशाला में आज पशुओं के लिए मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव दिखाई दे रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार लगभग एक दशक पूर्व जनसहयोग और उत्साह के साथ इस गौशाला की स्थापना की गई थी। प्रारंभिक वर्षों में यहां व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित होती रहीं, लेकिन समय के साथ रखरखाव में कमी आने लगी। वर्तमान में स्थिति यह है कि गौशाला में पर्याप्त चारा उपलब्ध नहीं है और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था भी नियमित रूप से नहीं हो पा रही है।


गौशाला में रह रहे मवेशियों के लिए पानी की समस्या गंभीर होती जा रही है। गर्मी के मौसम में यह संकट और बढ़ जाता है, जिससे पशुओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बनी रहती है। परिसर में बने कुओं का जलस्तर भी लगातार नीचे गिर रहा है, जिससे पानी की आपूर्ति बाधित हो रही है।
गौशाला समिति के सदस्यों का कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार प्रशासन को अवगत कराया गया है। जल संकट के समाधान के लिए नए कुएं के निर्माण सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए आवेदन भी दिया गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है।
स्थानीय नागरिकों और गौ-सेवकों ने प्रशासन से मांग की है कि गौशाला की वर्तमान स्थिति पर शीघ्र ध्यान दिया जाए। उनका कहना है कि गौशाला में रहने वाले पशु पूरी तरह मानव सहयोग पर निर्भर होते हैं, ऐसे में उनकी उपेक्षा करना अमानवीय है।

क्षेत्र में बहने वाली चंदन नदी के सूखने से जल संकट और गहरा गया है। समाजसेवियों का मानना है कि प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय समुदाय के संयुक्त प्रयासों से ही इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है। नियमित निरीक्षण, पर्याप्त संसाधन और पारदर्शी प्रबंधन से गौशाला की स्थिति में सुधार लाया जा सकता है।

