मूकनायक/ दुर्गेद्र सम्राट ब्यूरो प्रभारी बस्ती/ उत्तर प्रदेश
बस्ती। जनपद बस्ती में एक पत्रकार पर हुए हमले की घटना ने एक बार फिर पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, पत्रकार वैदिक द्विवेदी एक पेट्रोल पंप पर अपनी पेशेवर जिम्मेदारी निभाते हुए रिपोर्टिंग कर रहे थे। इसी दौरान पेट्रोल पंप से जुड़े एक व्यक्ति, तरुण सिंह, ने उन पर अचानक हमला कर दिया और उनके साथ मारपीट की।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पत्रकार वैदिक द्विवेदी किसी मुद्दे को लेकर तथ्य जुटा रहे थे और मौके से रिपोर्टिंग कर रहे थे। इसी बीच आरोपी तरुण सिंह वहां पहुंचा और बिना किसी ठोस कारण के उनके साथ अभद्रता करते हुए हाथापाई शुरू कर दी। घटना के दौरान पत्रकार को चोटें भी आईं, जिससे क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया।
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों और अन्य पत्रकारों में आक्रोश फैल गया। पत्रकार संगठनों ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए दोषी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ होते हैं और उन पर इस तरह का हमला न केवल व्यक्तिगत हमला है, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी सीधा प्रहार है।
पत्रकार संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि आरोपी के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए और उसे जल्द से जल्द गिरफ्तार कर सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है और इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
स्थानीय प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पीड़ित पत्रकार की तहरीर के आधार पर उचित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाएगा और दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि जिम्मेदारी से अपनी ड्यूटी निभा रहे पत्रकारों को कई बार कठिन परिस्थितियों और खतरों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है, ताकि वे बिना किसी भय के निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता कर सकें।
जनपद के बुद्धिजीवियों और समाजसेवियों ने भी इस घटना की निंदा करते हुए प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो ऐसे मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है, जो लोकतंत्र के लिए घातक साबित होगी।

