


दमोह/बालाघाट। मध्यप्रदेश में वर्षों से निष्ठा और समर्पण के साथ कार्यरत शिक्षकों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के सरकारी निर्णय के विरोध में अब आंदोलन तेज हो गया है। शिक्षक संगठनों ने इसे अन्यायपूर्ण बताते हुए सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की है।
इसी क्रम में 24 मार्च 2026 को मध्यप्रदेश शिक्षक संघ के नेतृत्व में शिक्षकों ने एकजुट होकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन लांजी-किरनापुर क्षेत्र के विधायक राजकुमार करहे के माध्यम से प्रेषित किया गया। ज्ञापन में कहा गया कि राज्य सरकार द्वारा नियुक्त शिक्षक पिछले 20-25 वर्षों से पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं और प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
शिक्षकों का कहना है कि अचानक टीईटी की अनिवार्यता लागू करना उनके आत्मसम्मान के साथ अन्याय है, जिससे उनमें असमंजस और चिंता की स्थिति उत्पन्न हो गई है। संघ ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस निर्णय पर पुनर्विचार कर वैकल्पिक व्यवस्था लागू की जाए, जिससे लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के भविष्य और सम्मान की रक्षा हो सके।
इस दौरान मप्र शिक्षक संघ इकाई लांजी एवं अन्य ब्लॉक शिक्षक संगठनों द्वारा संयुक्त रूप से ज्ञापन सौंपा गया। कार्यक्रम में ब्लॉक अध्यक्ष दुर्गेश फुल्लारे, संभागीय कोषाध्यक्ष प्रहलाद पटले, जिला उपाध्यक्ष चन्द्र किशोर भाटिया, वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष सीएल चौधरी, संभागीय सदस्य एसआर उके, ब्लॉक अध्यक्ष परसवाड़ा संतोष मेश्राम, तहसील अध्यक्ष खैरलांजी दामेन्द्र मन्दरेले, सदस्य श्री दरवड़े, तहसील अध्यक्ष लांजी तिड़के, कोषाध्यक्ष दहकर, चिखले, बसोने, सुलाखे, तहसील अध्यक्ष बिरसा प्रेम पटले, ब्लॉक अध्यक्ष भागीरथी पांचे, पूर्व तहसील अध्यक्ष हेमंत कुमार नेवारे, एसएस मेरावी, किशोर पटले, रूपेश खरोले, पूर्व जिला संगठन मंत्री मेघराज नगपुरे सहित बड़ी संख्या में शिक्षक एवं शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं।
इसी प्रकार हेमेन्द्र नेवारे के नेतृत्व में जिला पंचायत सदस्य अनुपमा नेताम को भी उनके निवास स्थान दमोह में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। इस अवसर पर भी बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहीं।

