मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
✍️✍️
जीवन में गिरना, असफल होना या गलती करना स्वाभाविक है, यह प्रगति का हिस्सा है, अंत नहीं । वास्तविक असफलता तब होती है, जब इंसान गिरकर फिर से उठने की हिम्मत हार जाता है और प्रयास छोड़ देता है। असफलता हमें अनुभव, सीख और भविष्य की सफलता के लिए मजबूत बनाती है । इसलिए हार ना मानना ही सबसे बड़ी विजय है । जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं । हम सभी अपने जीवन के किसी न किसी मोड़ पर गिरते हैं- कभी व्यावसायिक असफलताओं से, कभी रिश्तों में, तो कभी निजी गलतियों से।
आज का संघर्ष, दर्द और आंसू, कल आपकी सबसे बड़ी ताकत बनती है जो लोग गिरकर उठते हैं, वे अपनी कमजोरियों को अपनी ताकत में बदल देते हैं । जीवन साइकिल चलाने जैसा है, संतुलन बनाए रखने के लिए आपको चलते रहना पड़ता है । यदि आप गिरते हैं, तो धूल झाड़िए और फिर से शुरू कीजिए। हर बार जब आप उठते हैं, तो आप पहले से अधिक मजबूत और समझदार होते हैं क्योंकि अंत तक संघर्ष करने वालों की ही जीत होती है ।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

