मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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अनुशासन और संघर्ष ही जीवन का सार है, इनके बिना सफलता असंम्भव है । चुनौतियां और मेहनत हमें मजबूत बनाती हैं, सिखाती हैं और विकास के लिए प्रेरित करती हैं। अनुशासन और संघर्ष के बिना मिली सफलता का कोई वास्तविक महत्व नहीं होता और वह जीवन को नीरस व दिशाहीन बना देती है । कल्पना कीजिए कि आपको वह सब कुछ बिना मांगे मिल जाए जिसे दूसरे मेहनत से हासिल कर रहे हैं, ऐसी सफलता में ‘जीत’ का वह स्वाद नहीं होता जो पसीने की बुंदों से आता है। संघर्ष सफलता को ‘अर्थ’ देता है और अनुशासन उसे ‘स्थायित्व’ प्रदान करता है। इतिहास गवाह है कि महानता का मार्ग हमेशा कांटों भरा रहा है।
अनुशासन और संघर्ष दोनों ऐसे आधार स्तंभ हैं जिनके बिना ना तो सफलता टिकती है और ना ही उसका कोई सम्मान होता है। सफलता केवल एक गंतव्य नहीं, बल्कि एक यात्रा है। इस यात्रा में अनुशासन आपका सारथी है और संघर्ष आपका गुरु। इन दोनों के मिश्रण से जो सफलता प्राप्त होती है, वह ना केवल आपके जीवन को संवारती हैं, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणा बन जाती है क्योंकि कड़ी मेहनत, त्याग और धैर्य ही सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

