Tuesday, September 29, 2026
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दमन एवं दीव में काव्य रसिक संस्थान की साहित्यिक लहर में जल संचय का आह्वान

दमन एवं दीव में काव्य रसिक संस्थान की साहित्यिक लहर में जल संचय का आह्वान

मूकनायक

सिलवासा (दानह) :: पश्चिमी घाट की गोद में बसा , सागर के तट में दमन एवं दीव आधुनिक कला केन्द्र के संगम का आकर्षण, अपने शांत परिदृश्य, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्रकृति एवं आधुनिकता के जीवंत संगम को समेटे हुए जो ‘विला दे पाको छी एक्रोस’ के नाम से प्रसिद्ध शहर में काव्य रसिक संस्थान की दादरा एवं नगर हवेली ईकाई के तत्वावधान में 25 जनवरी 2026 को सिलवासा के कला केन्द्र आडोटोरियम में भव्य कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। साहित्य समाज का दर्पण होने के साथ-साथ सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण, ज्ञान का भंडार और समाज को नई दिशा देने वाला एक जीवंत माध्यम है। इस कार्यक्रम में कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. राम कुमार रसिक (संस्थापक राष्ट्रीय अध्यक्ष), मुख्य अतिथि सागर ठक्कर (प्रशासनिक अधिकारी), कार्यक्रम संयोजक डॉ. मीना सुरेश जैन ‘सुमीता’ (राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष) विशिष्ट अतिथि डॉ. राम रतन श्रीवास ‘राधे राधे’ (राष्ट्रीय महामंत्री), संध्या जैन ‘महक’ (छत्तीसगढ़), अमृतांशु शुक्ला (छत्तीसगढ़), राकेश कुमार ‘अयोध्या’ ( छत्तीसगढ़), निवेदिता वर्मा ‘मेघा’ छत्तीसगढ़, डॉ. अनिता कुमार मंच पर शोभायमान रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. राजेश कुमार पाण्डेय ‘सहज’, अभिनंदन अष्टगे, श्रीमती तोरल के द्वारा बेहतरीन अंदाज में किया गया।
डॉ. मीना सुरेश जैन ने हमारे संवाददाता को बताया कि यह साहित्यिक समागम जल संचय की थीम पर आधारित है । जल है तो कल है पर जोर दिया। इस कार्यक्रम में विभिन्न प्रदेशों के साथ साथ स्थानीय साहित्यकारों ने अपनी काव्य प्रस्तुतियों से मन मोह लिया। डॉ. राम कुमार रसिक ने बताया कि साहित्य, समाज को सही दिशा में ले जाने का प्रयास करता है। काव्य रसिक संस्थान भारत के 22 राज्यों के साथ साथ विदेश में भी इसकी शाखा है जिसमें अलग-अलग देशों के 46 कलमकार जुड़े हैं। डॉ. राम रतन श्रीवास’राधे राधे’ ने अपने उद्बोधन में काव्य रसिक संस्थान के बारे में विस्तृत जानकारी दी साथ ही जल ही जीवन है, वायु ही प्राण है के साथ पर्यावरण, जल संचय पर संकल्प लेने का आह्वान किया। मुख्य अतिथि सागर ठक्कर ने कहा कि काव्य रसिक संस्थान देश ही नहीं अपितु अंतरराष्ट्रीय साहित्य जगत में अपना परचम लहरा रहा है। हम सब इसके साक्षी हैं। मुझे गर्व है कि मैं इस संस्थान का हिस्सा हूंँ। इस कार्यक्रम में अभिनन्दन अष्टगे, सुश्री तोरल, राकेश कुमार अयोध्या, वाणी जैन, आभा अग्रवाल, डॉ निवेदिता वर्मा ‘मेघा’, रेखा अभिषेक, कल्पेश सोलंकी, डॉ, राम रतन राधे राधे, डॉ राजेश कुमार पाण्डेय ‘सहज’, रेखा शर्मा ,डॉ अनित कुमार, मृदुला तिवारी ,, शीला गोदाम , डॉ. वीरेंद्र सोलंकी, अमृतांशु शुक्ला, अंजना एन. सोलंकी, डॉ भागीरथ पाण्डेय, दिवाकर तिवारी, संध्या जैन, आंनद ढाले , द्वारकानाथ, भविन आहिर, विजय बहादुर इत्यादि के साथ साथ श्रोताओं का जमावड़ा हुआ। कार्यक्रम के दौरान बीच बीच में कवियों की प्रस्तुति से तालियों की गड़गड़ाहट से सभागार कक्ष गूंजायमान हो जाती। इस कार्यक्रम में कई प्रदेशों के कलमकारों ने प्रतिभाग किया। अंत में डॉ. मीना सुरेश जैन सुमीता के द्वारा आभार प्रकट किया गया।

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