Thursday, February 26, 2026
Homeदेशजीवन में आप अपने रास्ते को क्यों भूलते जा रहे हैं एक...

जीवन में आप अपने रास्ते को क्यों भूलते जा रहे हैं एक बीमारी है

मूकनायक/ देश

राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा

आज के स्वतंत्र जीवन में महिला खुद को रूढ़ि प्रथाओं मै क्यों घसीटती जा रही है।
जैसा कि आज की जवान शैली के बारे में सभी जानते हैं और हर इंसान नई आने वाली जीवन शैली को अपनाने के लिए भी तैयार कर लेता है आज की जो डिमांड हुआ उसके अनुसार वह स्वयं को ढाल लेता है चाहे वह किसी भी प्रकार की छोटी बड़ी स्थिति में ओर मुझे लगता है कि ऐसा परिवर्तनशील होना भी चाहिए अगर हम परिवर्तन को नहीं अपनाएंगे तो हम पीछे रह जाएंगे और जो अपनाएंगे वो बेशक आगे निकल जाएगा और उसके पास पीछे का अनुभव भी साथ होगा और आगे आने के लिए भी बो तैयार होगा क्योंकि उसने परिवर्तन को अपना लिया है बस ऐसे ही अगर हम सब परिवर्तन को तो अपनाते है पर पीछे के अनुभव को भूलते जा रहे है जब बाबा साहब ने इतनी मेहनत की अपने बच्चों को हमारे लिए कुर्बान कर दिए जिसका कर्ज तक नहीं हम चुका सकते ओर बाबा साहब का कर्ज चुकाने का प्रयास तो कर सकते पर हम महिलाएं वो भी नहीं करते जब हमको केवल एक भोग बिलाश की वस्तु समझा जाता था तो हमारे ही लोग कहते थे कि है ईश्वर हमको ऐसा जीवन क्यों दिया क्या कोई हमारी सुनेगा तब किसी ईश्वर ने नहीं सुनी सुनी तो एक महामानव जीता जगता ईश्वर बाबा साहब जिसने हमारी सारी इच्छाओं को पूरा किया और हमारा आज कल ओर आने वाला कल सब कुछ सम्भल दिया हमारे भविष्य का वरदान दिया है पर हमारी प्यारी महिलाएं ऐसे वरदानों को सम्भल न सकी और चल दी रूढ़ि प्रथाओं धर्म के रास्ते मै कहा ईश्वर से अपने सफल होने का आशीर्वाद मांगने के लिए ।बाबा साहब ने कहा शिक्षा लो जीवन में अपने पैरों पर खड़े हो जाएं हो तर्क मै सबसे आगे रहो क्योंकि मैने आपको रास्ता बना दिया है बस आपको चलना है पर हमारी महिलाओं को यह रास्ता इतना कठिन लगता है कि वह जाना ही नहीं चाहती क्योंकि अगर रास्ते पर चल लिया तो वह आत्मनिर्भर बन जाएंगी रूढ़ि प्रथाये छूट जाएंगी और वह अपना सम्मान स्वयं तय कर पाएगी पर इतना सब करने के लिए महिला को जो उसको चारों ओर से रूढ़ि प्रथाएं घेरे हुए है उनको तोड़ना होगा ।
ओर उनको तोड़ने के लिए खुद से ओर अपने समाज से दोनों से तर्क पूर्वक सामना करना होता ओर उसके लिए आपको बाबा साहब के द्वारा दिए हुए रास्तों पर चलना होगा चाहे कोई आपको आह्वान करके बुलाए ये न बुलाए आप अपने स्वयं के कर्तव्य से उन रास्तों को स्वतंत्रता पूर्वक चुने ओर अपने समाज ओर घर की तहत बने न कि वही पुरानी परंपरा प्रथाओं मै जुड़े रह कर अपना जीवन को केवल एक कठपुतली की भाती चलायमान रहने से समाज को महिला की जरूरत है क्योंकि बाबा साहब ने सभी को सामान अधिकार दिए है न किसी को कम न किसी को ज्यादा पर महिलाएं रूढ़ि प्रथाओं को छोड़ नहीं पा रही ओर अपने अधिकारों का समझ नहीं पा रही है ।
क्या महिला एक शिक्षक होके केवल शिक्षा का काम करती है क्या एक डाक्टर होकर केवल डाक्टर का काम करती है ओर भी बहुत क्षेत्र है जहां महिला जा चुकी है ओर कार्य कर रही है पर क्या कहा पर भी महिला है वहां पर वह अपनी रूढ़ि प्रथा को छोड़ देती है नहीं पर क्या वह उस स्थान पर जाकर बाबा साहब के दिए रास्ते को याद रखती हैं ये किसी एक दूसरी महिला को वहीं रास्ता दिखा देती नहीं अगर महिला इस कर पाएगी तो हम सब जरूर बाबा साहब ने जो हमारे लिए अपने बच्चों की कुर्बानी दी है उससे थोड़े से भागीदारी होने का स्थान बना पाएंगे क्या बाबा साहब ने बना के अच्छा नहीं किया जिससे हम सब अब सांस ले रहे है कपड़े पहन रहे है शिक्षा के रहे जीवन को ऊंचाई तक ले जा रहे कहा हम जाना चाह रहे ओर इस सब मै बाबा साहब को क्यों याद नहीं रखा जा रहा ओर क्या बाबा साहब एक समिति बनाए हुए लोगो के द्वारा आपके पास आकर आपको जगाने का कार्य मै लगी रहती है कि आप जगे कि जिस रास्ते पर आप चल कर आए हुए है वह आपके महामानव ने आपको बना के दिया है ओर आपके कमजोर पैर उस पर चल तो रहे है ओर जमीन को भूल रहे है ओर उसका एक ही कारण है आपकी रूढ़ि प्रथाये जिनको आप भूल नहीं पा रहे है ऐसा क्यों ?
लेखक : संध्यारमेश प्रेमी
सामाजिक चिंतक और पत्रकार
सागर संभाग ब्यूरो चीफ

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments