मूकनायक/ देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
निर्भया केस 16 दिसंबर 2012
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आज भी हम सबको 16 दिसम्बर 2012 की वो भयानक काली रात याद हैं, सर्द रात में हम सब अपने घरों में महफूज सो रहे थे और वहां दिल्ली की सड़कों पर एक मासूम की इज्जत और जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा था।
बात हो रही है निर्भया केस की जिसे कुछ दरिंदों ने बस में रेप को अंजाम दिया था। उनमें से एक नाबालिग भी था, जिसने सबसे ज्यादा क्रूरता दिखाई थी। फिर हमारा कानून ने ही उसे नाबालिग करार देकर उससे कम सजा दिलाने की मांग की थी। हम उस देश या समाज में रहते हैं , जहां 5 से 12 साल के बच्चें की टिकट लगती है और 18 साल के बच्चें को वोट देने का अधिकार दिया जाता हैं , तो फिर वही एक नाबालिग अगर रेप करता है तो समाज उससे बच्चे की नजर से क्यूं देखता है जैसे उससे कुछ अकल ही ना हो या उससे दुनियादारी की समझ ही ना हो। ये हमारा ही नहीं हमारे देश का भी दुर्भाग्य है। हम उस देश या समाज में रहते हैं जहां पर घर की बहु बेटियां सुरक्षित नहीं हैं। वो घर से बेफिक्र होकर दिन या रात में नहीं घूम सकती हैं, उनके दिमाग हमेशा एक खोफ या डर सा लगा रहता है।
निर्भया केस में निर्भया नाम पीड़िता को समाज और मीडिया द्वारा दिया गया था। जिसका अर्थ होता है कि बिना भय के । पीड़िता का असली नाम ज्योति सिंह था वो अपनी लड़ाई जिस तरह से लड़ी वो हम सब के लिए एक मिशाल हैं। और फिर अंत में वो दिन भी आया जब हमारी बहादुर बहन ने लड़ते लड़ते अपनी जिंदगी की आखिरी जंग भी हार गई । ज्योति सिंह ने इतनी शारीरिक पीड़ाएं सही फिर वो बच ना सकी । उनकी हालत को देखते हुए उन्हें 26 दिसम्बर 2012 को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में भेज दिया गया था जहां पर 29 दिसंबर 2012 उनकी मौत हो गई। या फिर यूं कहे कि हम सब मिलकर भी उन्हें बचा न सके। 30 दिसंबर 2012 को निर्भया को दिल्ली लाया गया और पुलिस की कड़ी सुरक्षा में उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस केस से हमे यह सबक तो मिलता है कि हमारी बहन बेटियां कितनी सुरक्षित है।
इस केस पर कानूनी कार्रवाई भी हुई। पांचों आरोपियों को पुलिस ने अपने कब्जें में ले लिया था और फिर उन पर कोर्ट कार्यवाही भी हुई । उनमें से एक तो नाबालिग भी था जिसने सबसे ज्यादा क्रूरता दिखाई थी। उसको नाबालिग दोषी करार देते हुए 3 साल की सजा सुनाई गई थी। ये हमारे देश का दुर्भाग्य है कि यहां पर 5 से 12 साल तक के बच्चे का टिकट लगता हैं और फिर ऐसा काम करने वाले को दोषी पाए जाने के बाद भी सही कार्यवाही नहीं की जाती हैं, हालाकि इस बात पर कोर्ट में काफी बहस भी हुई थी। 11 मार्च 2013 को मुख्य आरोपी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में ही फांसी लगा ली थी। 14 सितंबर 2013 को त्वरित गठित कार्यवाही के बाद चारों को फांसी की सजा सुनाई गई। फिर उसके बाद लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 20 मार्च 2020 को सुबह 5:30 बजे तिहाड़ जेल में आरोपियों को दोषी करार देते हुए फांसी दे दी गई। इस तरह से बहन निर्भया को संविधान द्वारा न्याय मिला।
आज के आधुनिक समाज में हम जितनी तरक्की कर रहे हैं, वही हमारी बहन बेटियां सुरक्षित नहीं हैं, क्यूंकि वो भी हर क्षेत्र में सफलता हासिल कर रही हैं, उन्हे भी काम करने के लिए घर या शहर से बाहर निकलना पड़ता है। पर इसका सीधा सा मतलब ये नहीं है कि वो घर या शहर से बाहर निकलना छोड़ दें इसका मतलब ये भी है कि हम सब को मिलकर एक ऐसा माहौल या समाज बनाना चाहिए कि वो खुद को महफूज समझ सकें और तरक्की के रास्ते पर चल सके।
हम पेरेंट्स को मिलकर एक बात ये भी समझना चाहिए, कि हमें अपने बच्चों को सही संस्कार या बहन बेटियां की इज्जत करनी सिखानी चाहिए ताकि ये हादसे कम हो।
अगर हम बात करें तो हम सबको को मिलकर एक ऐसा माहौल बनाना चाहिए कि हमारी बहन बेटियां को सुरक्षित महसूस कर सके। हमारी देश की सरकार को भी सख्त से सख्त कानून बनाने चाहिए और रेप करने वालों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। ताकि भविष्य में सबको सबक मिल सके। ऐसे मामलों पर सरकार तुरंत कार्यवाही करनी चाहिए।
जय भीम जय संविधान
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लेखक: नीलम सोनीपत
सामाजिक चिंतक और पत्रकार जिला ब्यूरो

