Thursday, February 26, 2026
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मैं आज इसलिए बहुत खुश हूँ।

मूकनायक

देश

“राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा “

बहुजनों के मसीहा, बहुजन महानायक, क्रांतिकारी महान तॅपस्वी,महान त्यागी, बहुजनों के मार्ग दर्शक और वैज्ञानिक से बने समाजिक वैज्ञानी मान्यवर साहिब श्री कांशीराम जी के त्याग और संघर्ष भरे जीवन की दास्तान हम आपके साथ सांझा करते हैं।

बात 1995 की है। साहेब चंडीगढ़ में श्री माता राम धीमान के घर रुके हुए थे। धीमान वह इंसान हैं, जिन्हें साहेब आपने साथ लेकर सुबह के चार-चार बजे तक चंडीगढ़ की सुखना झील के किनारे बैठकर सियासत के नक्शे बनाकर समझाते रहते थे।

उस रात भी रात के करीब 11-12 बजे होंगे कि साहेब बैठे-बैठे अचानक हँस पड़े। पास में बैठे धीमान ने पूछ लिया कि साहेब जी अकेले अकेले क्यों हँस रहे हो? हँसने का कुछ कारण हमें भी बता दो। साहेब ने जवाब दिया- यदि हँसने का कारण जानना चाहते है तो चलो, सुखना झील चलते हैं। वहाँ झील के किनारे बैठकर बताऊँगा कि आज मुझे हँसी क्यों आ रही है।
धीमान ने थोड़े चिंतित स्वर में पुछा- साहेब जी सिक्योरिटी ?
साहेब का हुक्म हुआ- सिक्योरिटी यहीं रहेगी, सिर्फ हम दोनों ही चलेंगे।

साहेब और धीमान सुखना झील के किनारे जा बैठे और साहेब ने मुस्कुराते हुए बात को खोला, “के धीमान आज मैं इसलिए खुश हूँ क्योंकि उत्तर प्रदेश में जो जूता मरम्मत करने का काम करता था मैंने उसे टिकट दी और वह भी जीत गया। जो मिट्टी के बर्तन बनाता था वह भी जीत गया। जो साइकिल को पंचर लगाता था वह भी एम.एल.ए. (MLA) बन गया। मैंने चरवाहे को भी टिकट दी और वह भी जीत गया। मैंने कबाड़ इकट्ठा करने वाले को भी टिकट दी वो भी जीत गया।

अब मैं यह सोचकर खुश हो रहा हूँ कि कल जब ये लोग टाई लगाकर कोट-पेंट पहनकर नई सरकारी गाड़ियों में बैठकर हाथों में लाल रंग की डायरी पकड़ कर विधानसभा जाकर सौगंध (oath) लेंगें तब अजीब सा नजारा होगा। मानो जैसे ये लोग नर्क भरी जिंदगी से निकलकर स्वर्ग में आ गए हो। वास्तव में ये वह मूलनिवासी लोग हैं जिनका कभी विधानसभा के सामने से गुज़रना तो बहुत दूर की बात, बल्कि इन्होंने विधानसभा का कभी नाम भी नहीं सुना होगा। ये वह लोग हैं जो सदियों से मनुवादी लोगों की झिड़कीयाँ खाते आए हैं। और शायद अब वक्त आ गया है कि ये लोग किसी मनुवादी अफसर की ऐसी की तैसी कर सकते हैं। इनमें से बहुत से लोगों ने अभी मंत्री बनना है।

अब मेरा थोड़ा सा सपना पूरा हुआ है। लेकिन अभी बहुत कुछ करना बाकी है क्योंकि यह तो अभी ना मात्र का एक ट्रेलर है। फिल्म तो अभी बाकी है। इतना कहते ही साहेब की आँखों में आँसू आ गए। मानो के जैसे कोई समुंदर में सैलाव आ गया हो।

जब मंत्रीमंडल का गठन हुआ तब जिन्हें कभी पेटभर रोटी नसीब नहीं हुई, साहेब ने उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार में फूड सप्लाई मंत्री बनाने की सिफारिश की और जिसके पास कभी साइकिल भी नहीं था उसे सरकार में ट्रांसपोर्ट मंत्री बनाने की सिफारिश की। जिसके पास जमीन का छोटा सा टुकड़ा भी नहीं था, खेती-बाड़ी मंत्री बना दिया और जो झोपड़ी में रहता था उसे आवास मंत्री बनाने की सिफारिश की।

इसके साथ ही, इनके मंत्री बनते ही, साहेब ने इन सभी मंत्रियों को सख्त हिदायत भी दी, ” अगर मुझे यह पता चला कि कोई मंत्री दो से अधिक सरकारी गाड़ियाँ अपने क़ाफ़िले में साथ लिए घूमता फिरता है तो मैं उसे मंत्री के पद से छुट्टी करके पैदल ही घर भेज दूँगा।”

यहाँ ऐतिहासिक बात यह दर्ज करने वाली है कि जितनी देर उत्तर प्रदेश में बसपा की समाजवादी पार्टी के साथ साझी सरकार रही, साहेब ने कभी भी किसी लाल बत्ती वाली कार में सफर नहीं किया। वे जब भी उत्तर प्रदेश में किसी राजनीतिक दौरे पर या सरकारी कार्यक्रम में भाग लेने गए तब सिर्फ आम साधारण गाड़ी में ही गए।

उन्होंने न सिर्फ अपने समाज का कर्ज चुकाया बल्कि हजारों सालों से जो समाज पिछड़ा, दलित, लाचार और बेवस था, उसका कर्ज चुकाया। साथ ही उन्हें बहुजन समाज को गौरव और सम्मान के साथ जीना सिखाया। उनके संघर्ष और त्यागमय जीवन की कई कहानियाँ हैं। जिसे आने वाली हजारों पीढ़ियों तक हमेशा याद रखा जाऐगा। और उनकी दूरदर्शी सोच को पढ़कर हमारे समाज के लोग ऐसे कार्य करने के लिए प्रेरित होते रहेंगे।

मान्यवर साहब श्री कांशीराम जी। वह व्यक्ति थे जिन्होंने डॉक्टर भीमराव अंबेडकर साहेब जी की विचारधारा को पुनर्जीवित किया और सदियों से दबे हुए समाज के लोगों को शिक्षित किया और उन्हें सम्मान और स्वाभिमान के साथ जीना सिखाया ओर ऊनको हुक्मरान बनाया

पड़े-लिखे कर्मचारी समाज को जागृत करने का फर्ज निभाए-साहेब कांशी राम।

प्रस्तुत करते है
इंजीनियर तेजपाल सिंह
94177-94756

जुॅग पलटाऊ बहुजन महानायक
पुस्तक -मैं कांशीराम बोलता हूं।

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