मूकनायक/ देश /राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
अंबेडकरवादी बिचारधारा से एससी-एसटी,पिछड़ी जाति, अल्पसंख्यक वर्ग जातियों को शोषण से बचाया जा सकता,मनुबादी से ओतप्रोत अंबेडकरवादी भारत के लोकतंत्र,संविधान एवं अंबेडकरवाद को नहीं बचा सकते,को लेकर आज का चिंतन!
भारत कृषि प्रधान एवं गांव का देश है।आजादी के बाद से गांवों की स्थिति में सरकार का योगदान बहुत कम, लेकिन किसानों मजदूरों ने भारत को खुद बदलने में बहुत बड़ा योगदान है। एससी-एसटी, पिछड़ी जाति, अल्पसंख्यक वर्ग जातियों के लोग मनुवादी से के लोगों की कठपुतली के कारण शोषित है।
निष्पक्ष सोच के कारण संगठनों एवं नेताओं, राजनेताओं की स्थिति में सुधार लाया जा सकता है, संगठन एवं नेतृत्व ही समस्याओं का समाधान एवं समस्याएं हैं। जिन्हें निष्पक्ष सोच रखने वाले लोग संगठन नेतृत्व की पहचान करके समाज को दिशा दशा सुनिश्चित करने में सहायक हो सकते, ऐसा लेबर पार्टी आफ इंडिया का मानना है।
एससी-एसटी,पिछड़ी जाति,अल्पसंख्यक वर्ग को ही बहुजन शोषित कहते हैं। बहुजन जातियों के लोगों को व्यवसायिक योजनाओं, राजनैतिक भागीदारी, आर्थिक उत्थान पर ध्यान एवं चिंतन से मनुवादी राजनेताओं,दलों,संगठनों के षड्यंत्र से सावधान रहने के लिए जातिवाद को छोड़कर वर्गवादी नेतृत्व के कारनामों के साथ चलकर पूंजीवादी व्यवस्था समूल नष्ट करना चाहिए।डॉ०अम्बेडकर वर्गवाद के समर्थक जातिवाद के खिलाफ थे। संविधान में वर्ग बनाकर जो लाभ दिया, उससे स्पष्ट है,कि वर्ग जातियों को अपने वर्ग जातियों को वर्ग नेतृत्व संगठन को मजबूत करने से लाभ हो सकता है,बटे रहोगे, तो पीड़ित अधिकारों, भागीदारी से बंचित रहोगे।
शोषितों ने बहुजन महापुरुषों को जातियों में बांटा, जिसके कारण संबिधान लोकतंत्र कुछ लोगों के परिवार की शोभा बढ़ा रहा है।एससी-एसटी,पिछड़ी जाति वर्ग जातियों के अंबेडकरवादी मनुवादी मानसिकता के गुलाम हैं। जिनके कारण बहुजन महापुरुषों के पदचिन्हों चलने के ठोंग लीला से जातिवाद मजबूत वर्गवाद कमजोर हुआ है। बहुजन महापुरुष सांझा विरासत संस्कृति का हिस्सा उन्हें जातियों में नहीं बांट सकते।डा0अम्बेडकर के नाम पर सबसे अधिक राजनैतिक संगठन नेतृत्व लाभ उठा रहे हैं, यह शोषितों को समझना होगा,तभी संविधान से लाभ उठा सकते।
अंबेडकरवाद भी दो भाग करके समझ सकते, एक अंबेडकरवाद अंवेडकरवाद जो उनके पदचिन्हों पर चलकर समाज को मजबूत करना चाहिता, लेकिन इनके पास संसाधनों का अभाव के कारण दिखाई नहीं देते हैं, दूसरे वह जो संसाधनों से मजबूत मनुवादी मानसिकता के गुलाम जो निजी स्वार्थ के लिए लोकतंत्र संविधान एवं महापुरुषों के नाम पर राजनीति कर रहे हैं। ऐसे लोग मनुवादियों के हाथों में सत्ता के खेल में भागीदार होने से बहुत बड़े हिस्से को उनके अधिकार नहीं मिल पा रहे हैं, यह समझना जरूरी है।
मनुवादी सोच सत्ता के लिए लोगों के ऊपर चढ़कर सत्ता हासिल करके भारत के पूंजीपतियों के हाथों की कठपुतली से भारत विकसित देश नहीं वन सकता। भारत के गरीब मध्यम वर्ग की सत्ता में भागीदारी हो सकती है, लेकिन उनके हाथ में शक्ति नहीं के बराबर होती है। पूजीबादी में अमीर और अमीर बनता है, बल्कि गरीब और अधिक गरीब होता है।अमीर वर्ग गरीब मजदूर किसान वेरोजगारों का शोषक वर्ग, उच्च सर्वण हिंदू हिंदुत्व के राजनैतिक दलों में मुख्य दल कांग्रेस,भाजपा,तृणमूल कांग्रेस आदि मनुवादी,सपा बसपा,राजद, जदयू मनुवादी सोच के लोग हैं, क्योंकि गांधीवाद,समाजवाद से सावधान समाजबाद के जनक राममनोहर लोहिया,जयप्रकाश नारायण,मधुलिमय राजनेतिक सवर्ण हिन्दू वह शोषितों के हितैषी नहीं? बल्कि सत्ता के लिए समाजवाद की बात करते हैं, वह सत्ता के लिए गरीबों की हितैषी है।
आंबेडकरवाद समाजवादी सामाजिक राजनैतिक चिंतन के जनक अछूत डॉ अम्बेडकर जो बहुजनों के नायक होना चाहिए,जो नहीं बन सके,बल्कि धनबानों के रहनुमा बनने का कारण गरीब मजदूर किसान वेरोजगार डॉ अम्बेडकर के सत्य को समझने में असमर्थ होने से अमीरों की कठपुतली बनने से अंबेडकरवाद को झटका लगा। अंबेडकरवाद अमीरों के सुख का साधन क्योंकि धनवान के कठपुतली लोग अमीरों के समर्थक होने से शोषित पीड़ित अधिकारों से बंचित है। समाजवाद गांधीवाद दोनों सांपनाथ नागनाथ जैसी विचारधारा मनुवादियों की पहचान को जड़ से उखाड़ फैंकने का संकल्प लेबर पार्टी आंफ इंडिया ने लिया है,आओ मिलकर संगठन नेतृत्व मजबूत करें।
भारत के लोगों को अपनी जाति का नेता अच्छा लगता है। चाहे उसमें एक हजार अबगुण और मनुबादी ही क्यों न हो? जाति के नेता के नाम पर लोग अंबेडकरवाद और अनुयाई होना भूल जाते हैं। यही कारण है, कि नया नेतृत्व नहीं पनप पा रहा है। ऐसे में अंबेडकरवाद की रक्षा नहीं हो सकती।
अंबेडकरवाद की असफलता है।अंबेडकरवाद में जातिबाद का शिकार होने से कमजोर, जबकि अंबेडकरवाद वर्गवाद का समर्थक जातिवाद के खिलाफ,फिर जातिवाद मजबूत होने समाज में विखराव हुआ है।अंबेडकरवाद, लोकतंत्र,संबिधान को बचाना है, तो वर्गवादी नेतृत्व संगठन को मजबूत करना होगा। यह एससी-एसटी पिछड़ी जाति, अल्पसंख्यक वर्ग जातियों को समझना होगा। सामाजिक परिवर्तन लाने में सामाजिक संगठनों की अपेक्षा राजनैतिक संगठन अधिक तेजी ला सकते हैं।
लोकतंत्र से संबिधान,संविधान से लोकतंत्र ऐसे ही अंबेडकरवाद से समाज,समाज से ही अंबेडकरवाद यह वर्गवाद की पहचान जिसे मजबूत करने की जरूरत है। मनु से मनुस्मृति विधान, मनुस्मृति से मनुवाद जो अंबेडकरवाद के खिलाफ षड्यंत्रों में धर्म में राजनीति, राजनीति के खिलाफ संबिधान लोकतंत्र इसे एससी-एसटी, पिछड़ी जाति, अल्पसंख्यक वर्ग जातियों को समझना होगा, तभी मनुवाद की सत्ता एवं शोषण, अत्याचार,उत्पीड़न,छूआछूत, भेदभाव से मुक्ति मिल सकती है। मनुवादी भाजपा शासनकाल में बहुजन शोषित वर्ग जातियों की हितैषी होने का दिखावा, शोषण का कारण बन रहा है।
अंबेडकरवाद जयभीम का उदघोष डा0अंबेडकर के सामने ही शुरू हो गया था।जयभीम का तात्पर्य शोषितों में क्रांति लाना से संवध जैसे राजनैतिक, सामाजिक,आर्थिक,धार्मिक क्षेत्रो परिवर्तन के लिए लड़ाई लड़कर क्रांतिकारी परिवर्तन लाना है। जिसके लिए बहुजन शोषित को बहुजन महापुरुषों का बंटवारा नहीं सांझा प्रेरणा लेकर लड़ाई लड़ना है। अंबेडकरवाद की पहचान जयभीम,समानता,भागीदारी,भाईचारा अंबेडकरवाद की मजबूती के कारण,अंबेडकरवादी मनुवादी मानसिकता से ग्रसित, स्वतंत्र विचारधारा के अंबेडकरवादी डा० अम्बेडकर के पदचिन्हों पर चलकर न्याय की बात करते हैं।लेबर पार्टी आंफ इंडिया का अपना कोई हित नहीं? बल्कि लोगों को व्यवसायिक, आर्थिक, राजनैतिक रूप से सक्षम बनाना है।यह शोषितों को समझने की जरूरत है।
डा अंबेडकर ने नबयान अर्थता भीमयान बौद्ध धर्म सम्प्रदाय की स्थापना की और बौद्ध धर्म का धार्मिक ग्रंथ(दी बुद्धा हिज इज धम्मा) को लिखा हैं। दुनिया में ऐसा कोई धार्मिक पैगंबर पैदा नहीं हुआ, जिसने खुद अपने धर्म का धार्मिक ग्रंथ लिखा हो। यह बात बैठक। बहुजन शोषित वर्ग के लोगों को समझाने-समझने की आवश्यकता है।
मानब कल्याण,मानवता की रक्षा अंबेडकरवाद से हो सकती, मनुवाद से नहीं हो सकती है। एससी- एसटी, पिछड़ी जाति,अल्पसंख्यक वर्ग के लोग अंबेडकरवाद के नाम पर गुमराह होने से बचा लेंगे,उसी दिन अंबेडकरवाद मजबूत हो जायेगा। बहुजन शोषित समाज के लोगों को समझना होगा,कि अंबेडकरवाद के चार सिद्धान्त, सामाजिक, राजनैतिक,आर्थिक,धार्मिक एवं एक मंत्र शिक्षित वनों, संगठित रहो, संघर्ष करो। डॉ अम्बेडकर मंत्र, सिद्धान्तों के विचारों के सार को समझ लेंगे,उसी दिन से से वर्गवादी बहुजन समाज मजबूत होकर सत्ता पर काबिज हो जाएगा।
बहुजन शोषित वर्ग के कुछ स्वार्थी नेता, राजनेता बहुजन शोषण समाज को बांटने के लिए महापुरुषों को पैदा करके बहुजन शोषित वर्ग को बांटने का काम कर रहे है। ऐसे लोगों से सावधान रहकर ही गरीब शोषित सत्तासीन बन सकता है, जबकि भारत का लोकतंत्र पूंजीवादी हों चुका है, जिसमें गरीब चुनाव नहीं लड सकता, पूंजीवादी लोकतंत्र तभी खत्म हो सकता है, जब बहुजन संगठित होगा। लेकिन अब तक संगठित करने के लिए जो संगठन और नेता,राजनेता बनें,बह सभी आज तक नाकामयाब रहे हैं। इसलिए नेतृत्व और संगठन दोनों एकता के लिए गुणकारी और महत्वपूर्ण है। इस बिषय को समझना होगा, और इसकेे लिए खुद अपने अंदर नेतृत्व पैदा करने की जरूरत है। जिसके बिना कुछ भी नहीं हो सकता।
बहुजन शोषित राजनेता ,महापुरुष के वचनों को अपने अंदर आत्मसात कर लेंगे,उसी दिन से बहुजन शोषित वर्ग जातियों में बंधुता के कारण भेदभाव मिटाकर भाईचारा को मजबूत किया जा सकता है। जिसके कारण मन के अंदर भेदभाव को मिटना होगा। भेदभाव, छूआछूत जैसी भावना पैदा करने में मनुस्मृति मनुवाद का बहुत बड़ा योगदान रहा है। जिसके कारण बहुजन समाज जातियों में बांटा इसका सबसे बड़ा को दोष ब्रह्मांण हिंदू समाज का धर्म, धर्मग्रंथों का ही है। हिंदू हिंदुत्व शअछूतों के सबसे बड़े दुश्मन है। इसकी गारंटी लेबर पार्टी आफ इंडिया देती है।
लेबर पार्टी आफ इंडिया का एक बिजन अंबेडकरवाद,एक रास्ता,एक बिचार,एक झंडा, एक संगठन सांझा विरासत संस्कृति रणनीति नीति नियम नियत के अनुसार काम कर रही है।बहुजन शोषित समाज के लोगों को अकेले अकेले चलने की आदत बन चुकी है,त्याग भावना नेतृत्व स्वीकार करने का बहुत बड़ा अभाव है। ऐसा ही रहा, तो एक दिन गुलाम बनना पक्का है, यह समय कभी आये, लेकिन आयेगा जरुर, उसी दिन से गुलाम-गुलामी पक्की है।बहुजन समाज के राजनेताओं में लालू यादव,मुलायम सिंह यादव,नीतीश जी मायावती सभी सत्ता में भी रहे-या है,क्या किसी ने आपको व्यवसायिक बनानें में मदद की ऐसा हमें नहीं लगता है।शिक्षा चिकित्सा रोजगार,आर्थिक,सामाजिक बराबरी नहीं दिला सके,उसके बाबजूद लोग कुछ नया नहीं कर पा रहे हैं,इसका कारण जातिवाद है।
लेबर पार्टी आफ इंडिया के साथ जो एक ऐसा विकल्प लेकर आयी है, जिसमें गरीब चुनाव लड़ेगा, सत्ता संभालेगा। कांशीरामवाद समस्याओं का समाधान नहीं? बल्कि समस्याएं पैदा कर सकता, जबकि आंबेडकरवाद ही समस्याओं का समाधान जड़ से खत्म करने में सक्षम है। डॉ अम्बेडकर का अनुकरण करो, मानसिक गुलामी से मुक्ति पाओ, सत्ता पर कब्जा करने के तैयार हो जाओ,शोषित समाज के पास यही एक रास्ता है। जिसके कारण गुलामी से लोगों को बचाकर सत्तासीन बनाया जा सकता है।
लेखक: रवि शेखर बौद्ध मेरठ

