मूकनायक
देश
अनिल साखरे की कलम से…..✍️
हरियाणा, जम्मू-कश्मीर दोनों राज्यों के चुनावों में हरियाणा में भाजपा तीसरी बार सरकार बना रही है तो जम्मू-कश्मीर में पूरे 10 साल बाद चुनाव करवाये गये। इस चुनाव में भाजपा जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने , धारा 35 ए लगाने, नेशनल कॉन्फ्रेंस +कांग्रेस इसे वापस लेने के मुद्दे चर्चा में रहे। हालांकि दोनों राज्यों में एक में जीत और एक में हार का विश्लेषण तो यही होता है, मुकाबला बराबरी पर छूटा है। इन चुनावों में नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी चर्चा का केंद्र बने रहे? जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस+ नेशनल कांफ्रेंस के गठ बंधन को जीत मिली तो भाजपा को हरियाणा में तीसरी बार सत्ता में आने का मौका मिला है। सूत्रों से मिली जानकारी कांग्रेस की हार का मुख्य कारण आरएसएस के 16000 स्वयंसेवक थे जिन्होंने सत्ता विरोधी लहर को भापकर गांव-गांव घर-घर में जाकर हरियाणा की जनता को समझाया और संविधान और महंगाई विरोध के कार्ड को डबल इंजन की सरकार में बदलने की कवायत की कांग्रेस अति आत्मविश्वास के साथ लबालोब होकर चुनाव लड़ रही थी उन्हें यह पता भी नहीं था की अंदर खाने आरएसएस और बीजेपी कौन सा खेल खेल रही है । कांग्रेस को आत्ममंथन की जरूरत है कि क्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पंजाब, उत्तराखंड की तरह हरि याणा की जीती बाज़ी भी उसने गंवा दी, सैनी केबिनेट के अधिकांश मंत्रियों की हार भी यह बता रही है कि जनता ने भाजपा के काम पर मुहर ही नहीं लगाई है,कोई और ही वजह भाजपा की जीत का कारण बनी, कांग्रेस, सीएम कौन बनेगा हुड्डा या शैलजा इसी विवाद के चलते निपट गई? चुनावों से यह सामने आया है कि भाजपा का साथ देने वाली पार्टियों को अपने भविष्य की चिंता करनी चाहिये। क्योंकि हरियाणा में जेजेपी,जम्मू-कश्मीर में पीडीपी साफ़ हो गई है। एक वक़्त में इन दोनों के साथ मिलकर भाजपा ने सरकारों का गठन किया था।बिहार महाराष्ट्र,झारखंड में भाजपा का साथ जदयू, लोजपा, शिवसेना शिंदे,अजित पवार एनसीपी दे रहे हैं।अब इन दलों को सोचना है कि वो अपने भविष्य-अस्तित्व को भाजपा से कैसे बचाएं?

