Thursday, February 26, 2026
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विवाद डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर मेमोरियल सोसायटी का….

मूकनायक

मध्य प्रदेश/महू

ओमप्रकाश वर्मा

डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर मेमोरियल सोसायटी (भीम जन्मभूमि स्मारक) महू के अध्यक्ष भंते सुमेध बोधी का निधन हो चुका है, इनके अध्यक्ष रहते हुए निष्कासित सचिव राजेश वानखेड़े ने अपने दलबदलु मामा कोषाध्यक्ष अरुण कुमार इंगले और पद प्रतिष्ठा के लालची उपाध्यक्ष डॉ. अनिल गजभिए के साथ मिलकर समिति में फर्जीवाड़ा, जालसाजी, हेराफेरी, भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और अनियमितता की। जिसमें उक्त भंते जिनकी दोनों किडनी खराब थी, महीने में दो बार जिनका डायलिसिस होता था। वटफड़ी महाराष्ट्र में इनका बौद्ध विहार भी है। अपनी बीमारी और वहा के लगाव के चलते वो भीम जन्मभूमि महू आने और रहने में असमर्थ थे। साल में सिर्फ तीन बार या अनिवार्य होने पर ही मीटिंग में शामिल होने आते थे।

चूंकि समिति में पूर्व अध्यक्ष भंते संघशील जी ने अपने रहते हुए संस्था के बायलाज में बौद्ध भिक्षु के अध्यक्ष होने की अनिवार्यता के ना बदले जा सकने वाले नियम का ध्यान रखते हुए तीन बौद्ध भिक्षुओ भदंत सुमेध बोधी जी, भदंत डॉ. उपगुप्त जी और भंते नागदीपंकर जी को सदस्य बना दिया था, ताकि भविष्य में उनके नहीं रहने पर उक्त नियम की प्रतिपूर्ति की जा सके।

राजेश वानखेड़े की नियत को सभी पुराने सदस्य जानते समझते थे और उक्त दोनो बौद्ध भिक्षुओं ने कभी भी उसे किसी प्रकार का सहयोग नहीं किया और इसने भी इन्हें अपना धुर विरोधी मानते हुए दोनों भिक्षुओं को नियम विरुद्ध जाकर समिति से बाहर कर दिया। जो कार्यवाही अवैध एवं शून्य है।

अब चुंकि सुमेध बोधी भी जीवित नहीं रहे और नियम है कि समिती का अध्यक्ष कोई बौद्ध भिक्षु ही हो सकता है, ये नियम नहीं होता तो खुद ही सर्वेसर्वा भी बन जाता।

खैर, इसने पहले भंते धम्मदीप को फर्जी तरीके से सदस्य बनाया और बहुमत नहीं होने के बावजूद भंते प्रज्ञाशील जी के विरोध में फर्जी बैठक कर जन्मभूमि का अध्यक्ष घोषित किया और दुष्प्रचार कर रहा है। भंते धम्मदीप को विद्वान, ज्ञानी और महामंडित कर रहा है।

ये बात भंते धम्मदीप भी अच्छे से जानता है कि राजेश वानखेड़े ने समिति में फर्जीवाड़ा करके ही अपने भाई भतीजे, नाते रिश्तेदार और कथित लोगों को फर्जी सदस्य बनाया है।
बाबासाहेब ने कहा था कि “ये ज़रूरी नहीं कि बहुत ज्यादा पढ़े लिखे लोग, कोई डॉक्टर, कोई ias, ips, कोई इंजीनियर, कोई वकील या कोई लेखक ही बुद्धिजीवी हो… उन्होंने कहा कि बुद्धिजीवी व्यक्ति वो है जो संकट के समय जो पहल करे, मार्गदर्शन करे और जरूरत होने पर नेतृृत्व करे। बुध्दिमान व्यक्ति भला भी या दुष्ट भी हो सकता है। यह उसकी प्रज्ञा और प्राप्त करने वाले लक्ष्य पर निर्भर करता है। बुध्दिमान व्यक्ति पथ भ्रष्ट लोगों को सही रास्ते पर लाने को हमेशा तैयार रहता है”

बाबासाहेब की रचना के इस महत्वपूर्ण कोटेशन का उल्लेख करने की आवश्यकता इसलिए रही कि अभी जिस भंते धम्मदीप को ज्ञानवान, शिलवान और विद्वान बताने का दुष्प्रयास किया जा रहा है, दरअसल वो गुजर चुके भंते सुमेधबोधी का करीबी रिश्तेदार है, हर बार भंतेजी के साथ वो ही स्मारक पर आया। राजेश वानखेड़े ने सदस्यो से धोखा किया, समिति में फर्जीवाड़ा किया, जालसाजी की, हेरफेरी की, हिसाब समिति को नहीं दिया, सदस्यों ने भरी सभा में राजेश वानखेड़े का विरोध किया यह सब भी उसने और उसके साथियों ने देखा। लगभग झूमझटकी हो गई ये सब भी भंते धम्मदीप ने देखा।

इतना सब कुछ जानने समझने के बाद कोई आम व्यक्ति ही गलत का साथ देने और अगुआ बनने की हिम्मत कर सकता है, लेकिन कोई बौद्ध भिक्षु नही, चाहे वो साधारण श्रामनेर हो या महास्थवीर।

भंते सुमेध बोधी को तो कोरे चेको, कोरे लेटरपेड पर साइन करने का डर तथा सामाजिक बदनामी का डर बताकर, धमकाकर, जेल का भय दिखाकर राजेश ने अपने साथ किया हो। लेकिन भन्ते धम्मदीप तो सब जान बुझकर, समझकर उसके षड्यंत्र का शिकार हो रहे है? या फिर ये जन्मभूमि के अध्यक्ष बनने का लालच तो नहीं है?

इंदौर में तो सारा समाज, सभी अम्बेडकर अनुयाई राजेश वानखेड़े और उसका साथ देने वालो के विरोध में है, गहरा रोष भी है। ये बात जाहिर भी हो गई।

भंते धम्मदीप की विद्वता का गुणगान किया जा रहा है, महाराष्ट्र में जहा लोगों को जन्मभूमि के विवाद की खबर नहीं, या गलत प्रचार किया हो, वहा के लोगों द्वारा स्वागत कराया जा रहा है। लेकिन तब क्या होगा जब भंते धम्मदीप की हकीकत पता चलेगी???

समर्पण हो या विद्वता इन दोनों ही तत्वों को किसी आवरण की जरूरत नहीं पड़ती। दिवंगत अरविंद वासनिक जी ने पूजनीय भंते संघशील बनकर भीम जन्मभूमि बचाने के लिए अपने जीवन का सबसे बड़ा त्याग किया था वो एक बड़े अधिकारी थे, और एक बार फिर से उसी काल की पुनरावृति हुई जब माननीय प्रकाश वानखेड़े जी ने गद्दारों से भीम जन्मभूमि बचाने के लिए अपने जीवन का सबसे बड़ा त्याग कर भंते प्रज्ञाशील बने।
सांच को आंच क्या
बाबासाहेब ने कहा था कि मुझे मेरे समाज के पढ़े लिखे लोगों ने धोखा दिया है,

डॉ. अनिल गजभिए और भंते धम्मदिप भी उसी श्रेणी के लोग हैं। और ये बताने की जरूरत नहीं है कि अम्बेडकर अनुयायी ऐसे गद्दारों का इलाज करना अच्छे से जानते हैं।

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