



तथागत बुद्ध की शिक्षाओं, करुणा, मैत्री और प्रज्ञा के प्रसार पर हुई चर्चा; वयोवृद्ध भंते बोधि धम्म जी की सेवा का लिया संकल्प
दमोह (बालाघाट), 23 अक्टूबर 2026। ग्राम दमोह स्थित प्रज्ञादीप बुद्ध विहार में शुक्रवार को दोपहर लगभग 1 बजे हट्टा, जिला बालाघाट से पूज्य भंते थेरोमुनी जी का संक्षिप्त आगमन हुआ। उनके आगमन से बुद्ध विहार में धम्ममय वातावरण निर्मित हुआ। इस अवसर पर तथागत गौतम बुद्ध की शिक्षाओं, धम्म के सिद्धांतों, उनके व्यावहारिक महत्व तथा समाज में धम्म के प्रचार-प्रसार को लेकर ज्ञानवर्धक चर्चा हुई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस अवसर पर पूज्य भंते बोधि धम्म जी, दमोह तथा उपासक आयुष्मान एस. आर. उके, पाण्डूलाल रामटेके और रुपेश खरोले उपस्थित रहे। उपस्थित जनों ने धम्म के अध्ययन, चिंतन, आचरण और सामाजिक जीवन में उसकी उपयोगिता से जुड़े विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। चर्चा में बुद्ध की शिक्षाओं को जीवन में आत्मसात करने तथा समाज में शांति, सद्भाव, करुणा, मैत्री और प्रज्ञा की भावना को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर दिया गया।
भंते थेरोमुनी जी के अध्ययन एवं शोधकार्य की सराहना
धम्मचर्चा के दौरान पूज्य भंते थेरोमुनी जी द्वारा धम्म के क्षेत्र में किए जा रहे अध्ययन, शोधकार्य और उनकी शोध-प्रबंध संबंधी उपलब्धियों को सराहनीय एवं प्रेरणादायी बताया गया। धम्म के प्रति गंभीर अध्ययन, वैचारिक स्पष्टता और ज्ञानार्जन की प्रवृत्ति बौद्ध समाज के लिए महत्वपूर्ण मानी गई।
इस अवसर पर यह विचार भी सामने आया कि धम्म का गहन अध्ययन न केवल बौद्ध दर्शन को समझने में सहायक है, बल्कि नई पीढ़ी को भी तथागत बुद्ध की शिक्षाओं से जुड़ने और उन्हें अपने जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित करता है।
धम्म केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मनुष्य के विचारों, आचरण, व्यवहार और सामाजिक उत्तरदायित्वों को परिष्कृत करने का मार्ग है। बुद्ध की शिक्षाओं के अनुरूप प्रज्ञा, शील और करुणा को जीवन में अपनाना ही धम्म के वास्तविक महत्व को समझने की दिशा में सार्थक कदम है।
वयोवृद्ध भंते बोधि धम्म जी की सेवा का दिया आश्वासन
इस अवसर का महत्वपूर्ण पक्ष यह रहा कि पूज्य भंते थेरोमुनी जी ने वयोवृद्ध पूज्य भंते बोधि धम्म जी की समय-समय पर सेवा-सुश्रुषा करने तथा उनके प्रति सहयोग और सम्मान का भाव बनाए रखने का आश्वासन दिया। साथ ही उन्होंने क्षेत्र के उपासक-उपासिकाओं को समय-समय पर धम्म का लाभ प्रदान करने के लिए यथासंभव समय देने और सहयोग करने की बात कही।
उनका यह आश्वासन गुरुजनों के प्रति आदर, वयोवृद्धों की सेवा, सामाजिक सद्भाव और धम्म के प्रति समर्पण की भावना को दर्शाता है। बौद्ध परंपरा में करुणा, मैत्री, कृतज्ञता और सेवा को विशेष महत्व दिया गया है। ऐसे सेवाभावी संकल्प धम्मानुयायियों के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करने के साथ समाज में सकारात्मक चेतना के विस्तार में भी सहायक होते हैं।
समता, बंधुता और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने पर जोर
ग्राम दमोह स्थित प्रज्ञादीप बुद्ध विहार में धम्मचर्चा और भंतेगण के सान्निध्य में होने वाले ऐसे आयोजन क्षेत्र के उपासक-उपासिकाओं के लिए ज्ञानार्जन एवं वैचारिक प्रेरणा का माध्यम हैं। धम्म के प्रति जागरूकता बढ़ाने, बुद्ध के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने तथा सामाजिक जीवन में समता, स्वतंत्रता, बंधुता और मानवीय गरिमा जैसे मूल्यों को सुदृढ़ करने में ऐसे संवाद महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
पूज्य भंते थेरोमुनी जी का यह संक्षिप्त आगमन धम्मचिंतन, ज्ञानवर्धक संवाद, गुरुजनों के प्रति सम्मान और भविष्य में धम्मसेवा के संकल्प को प्रोत्साहित करने वाला अवसर रहा। उपस्थित उपासकों ने उनके आगमन एवं मार्गदर्शन को महत्वपूर्ण बताते हुए आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी क्षेत्र के धम्मानुयायियों को उनका सान्निध्य प्राप्त होता रहेगा।
तथागत गौतम बुद्ध के शांति, करुणा, मैत्री और प्रज्ञा के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने तथा धम्म के माध्यम से समाज में सद्भाव एवं मानवीय मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में ऐसे प्रयास निश्चित रूप से प्रेरणास्रोत बन सकते हैं।

