महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन की गूंज नागपुर में गुंजी ,छत्तीसगढ़ प्रदेश समिति ने शांति रैली में लिया भाग
बिलासपुर छत्तीसगढ़
मूकनायक
छत्तीसगढ़ प्रभारी
////महाबोधि महाविहार को बौद्ध समाज को सौंपने और बोधगया मंदिर अधिनियम, 1949 को निरस्त करने की उठी मांग/////
नागपुर। बोधगया स्थित विश्व प्रसिद्ध पवित्र महाबोधि महाविहार की मुक्ति तथा बोधगया मंदिर अधिनियम, 1949 (BT Act 1949) को निरस्त करने की मांग को लेकर महाबोधि महाविहार बोधगया मुक्ति आंदोलन राष्ट्रीय समिति के तत्वावधान में नागपुर, महाराष्ट्र में विशाल शांति रैली का आयोजन किया गया। इस रैली में महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन छत्तीसगढ़ प्रदेश समिति के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर आंदोलन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
अशोक विजयादशमी एवं धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस की 70वीं वर्षगांठ के ऐतिहासिक अवसर पर आयोजित यह शांति रैली संविधान चौक से प्रारंभ होकर ऐतिहासिक दीक्षाभूमि, नागपुर तक पहुँची। रैली के माध्यम से महाबोधि महाविहार की मुक्ति, बौद्ध समाज के धार्मिक अधिकारों तथा बोधगया मंदिर अधिनियम, 1949 को निरस्त करने की मांग को प्रमुखता से उठाया गया।
महाबोधि महाविहार बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र आस्था और ऐतिहासिक महत्व का केंद्र है। आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि महाबोधि महाविहार का प्रबंधन बौद्ध समाज की भावनाओं, धार्मिक परंपराओं और अधिकारों के अनुरूप होना चाहिए। इसी उद्देश्य को लेकर देशभर में आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन दिलाने तथा समाज में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
रैली की प्रमुख मांगें
बोधगया मंदिर अधिनियम, 1949 (BT Act 1949) को तत्काल निरस्त किया जाए।
पवित्र महाबोधि महाविहार का पूर्ण अधिकार एवं प्रबंधन बौद्ध समाज को सौंपा जाए।
महाबोधि महाविहार की मुक्ति के लिए देशव्यापी जनजागरण अभियान को व्यापक बनाया जाए।
बौद्ध समाज की धार्मिक भावनाओं, परंपराओं एवं अधिकारों का सम्मान सुनिश्चित किया जाए।
छत्तीसगढ़ प्रदेश समिति की सक्रिय सहभागिता
इस ऐतिहासिक शांति रैली में छत्तीसगढ़ प्रदेश समिति की ओर से विजय बोरकर, बसंत बौद्ध, मुकेश गोंडाले, रोशनी गोंडाले, हर्षिता, राजकुमार भारती, देवप्रसाद गेंदले, विजय बंजारे, प्रमेश मिरी, संघमित्रा बंजारे, रामकुमार बघेल, अमरदीप बंजारे, रामचंद्र कुर्रे एवं जीवनदीप बंजारे सहित अन्य साथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
छत्तीसगढ़ प्रदेश समिति के सदस्यों ने एकजुटता के साथ महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन को निरंतर आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि महाबोधि महाविहार की मुक्ति एवं बोधगया मंदिर अधिनियम, 1949 को निरस्त करने की मांग को लेकर लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष जारी रखा जाएगा।
एकजुटता, शांति और संकल्प का संदेश
नागपुर की संविधान चौक से दीक्षाभूमि तक निकली यह शांति रैली महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन के प्रति एकजुटता व्यक्त करने का महत्वपूर्ण अवसर बनी। रैली में छत्तीसगढ़ प्रदेश समिति की सहभागिता ने आंदोलन के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
समिति के सदस्यों ने संकल्प दोहराया कि जब तक महाबोधि महाविहार को बौद्ध समाज की मांग के अनुरूप पूर्ण अधिकार एवं प्रबंधन नहीं मिलता और बोधगया मंदिर अधिनियम, 1949 को निरस्त करने की मांग पूरी नहीं होती, तब तक आंदोलन के लिए उनका प्रयास जारी रहेगा।
“महाबोधि महाविहार की मुक्ति हमारा संकल्प है, बौद्ध समाज के अधिकारों की रक्षा हमारा उद्देश्य है और शांतिपूर्ण संघर्ष हमारा मार्ग है।”






